इति सिद्धम: सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस का कर्नाटक किला बरकरार, इतिहास-BJP दोनों को मात

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का ‘भाग्य’ कर्नाटक के रण में तेज चमक रहा है. सिद्धारमैया को बेहद कारगर रहीं अपनी कल्याणकारी योजनाओं से सिद्धि हासिल हो गई लगती है. ये कांग्रेस छत्रप इसी ‘भाग्य’ की सिद्धि के दम पर मोदी-शाह के विजय रथ को कर्नाटक में रोकने में कामयाब रहा है. भारत के सबसे ज्यादा खरा उतरने वाले ‘एक्सिस माय इंडिया’ की ओर से इंडिया टुडे के लिए कराए गए एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक कर्नाटक में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने जा रही है.

सिद्धारमैया के ‘भाग्य’ के आगे इतिहास-BJP दोनों पस्त

एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस को कर्नाटक में 106-118 सीट मिलने जा रही हैं. शनिवार को कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों के लिए मतदान हुआ था. कर्नाटक विधान सौध (विधानसभा) में बहुमत का जादुई आंकड़ा 113 है. क्योंकि अभी 222 सीटों के लिए मतदान हुआ है तो फिलहाल बहुमत के लिए 112 सीट की ही आवश्यकता है.

एक्सिस के अनुमान के मुताबिक कांग्रेस एंटी इंकम्बेंसी पर आसानी से पार पाते हुए कर्नाटक में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है. राज्य में 1985 के बाद से कोई पार्टी लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत पाई है. 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता पार्टी दोबारा चुनाव जीतकर सत्ता में आई थी.

कर्नाटक में कांग्रेस के विजेता के तौर पर उभरने की मुख्य वजह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का जाति समीकरणों को साधना रहा है. सिद्धारमैया अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों और दलितों (AHINDA) को मिलाकर बड़ा जातीय गठबंधन बनाने में कामयाब रहे. बीजेपी अपने लिंगायत वोट बैंक में कोई सेंध लगने को रोकने में कामयाब रही, लेकिन खुद किसी बड़े सामाजिक गठबंधन का तानाबाना नहीं बुन पाई जो सिद्धारमैया के AHINDA फॉर्मूले को मात दे पाता.

BJP की उम्मीद के मुताबिक नहीं चला रेड्डी ब्रदर्स कार्ड

एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि इस चुनाव में ऐसा कोई एक मुद्दा या ट्रेंड नहीं रहा जो कर्नाटक के सभी 6 क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी रहा. कर्नाटक में हर क्षेत्र का अपना एक खास मिजाज होने की वजह से अपना अलग वोटिंग का तरीका रहा. हैदराबाद कर्नाटक में कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करते हुए 40 में से 33 सीट पर जीत हासिल करती नजर आ रही है. हैदराबाद कर्नाटक में बेल्लारी समेत 6 जिले हैं, यहां बीजेपी ने बदनाम रेड्डी भाइयों और उनके सहयोगियों को 8 टिकट दिए. एग्जिट पोल के आंकड़े बता रहे हैं कि रेड्डी कार्ड वैसा नहीं चल पाया जैसा कि बीजेपी ने उम्मीद लगाई थी.

देवेगौड़ा के गढ़ में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन

कांग्रेस ने ओल्ड मैसूर (दक्षिण कर्नाटक) क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन किया है. इस क्षेत्र की 64 सीटों में से कांग्रेस को 33 सीटों के मिलने का अनुमान है. एग्जिट पोल के बड़े निष्कर्ष के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि दक्षिण कर्नाटक में मुस्लिमों ने कांग्रेस को जमकर वोट दिया है. पुराने मैसूर में मुस्लिम वोट कांग्रेस और जनता दल सेकुलर (JDS) में बंटा जरूर, लेकिन एक्सिस का डेटा बताता है कि 77 फीसदी मुस्लिमों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाले. JDS को इन सीटों पर परंपरागत वोक्कालिग्गा (54%) वोट मिले, लेकिन पार्टी मुस्लिमों और दलितों के अतिरिक्त वोट पाने में नाकाम रही. अगर ऐसा हो पाता तो पार्टी जो क्षेत्र देवेगौड़ा का गढ़ माना जाता रहा है वहां अच्छा प्रदर्शन दिखा सकती थी.

ओल्ड मैसूर क्षेत्र की 64 सीटों पर बीजेपी की स्थिति अतीत में कभी मजबूत नहीं रही है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति का सारा दांव इस पर टिका था कि इस क्षेत्र में JDS अच्छे से अच्छा प्रदर्शन करे. JDS की यहां हालत खस्ता होने का सीधा लाभ कांग्रेस को मिलता नजर आ रहा है. अगर यहां JDS मजबूत रहती तो स्थिति उलट सकती थी.

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