जानें- कोरोना वायरस वैक्‍सीन की रेस में कौन सी कंपनी है कहां और भारत में कौन मारेगा बाजी

वैश्विक महामारी कोविड-19 के दस माह बीत जाने के बाद अब इसकी वैक्‍सीन को लेकर उम्‍मीदें बढ़ गई हैं। फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना और स्‍पुतनिक की वैक्‍सीन के सफल परीक्षण के बाद माना जा रहा है आने वाले कुछ माह में लोगों को इसकी उपलब्‍धता हासिल हो जाएगी। फाइजर कंपनी की वैक्‍सीन ने तीसरे चरण का ट्रायल सफल होने का एलान किया है। एक तरफ जहां पर भारत की नजर पूरी दुनिया में इसकी रोकथाम के लिए बन रही वैक्‍सीन पर है तो वहीं सभी वैक्‍सीन निर्माताओं की नजरें भारत पर टिकी हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि कोई भी वैक्‍सीन यदि सभी चरणों को पूरा कर अंतिम पड़ाव को पार कर जाती है तो उसका सबसे बड़ा ग्राहक भारत ही होगा।

कुछ का हो चुका है अंतिम ट्रायल तो कुछ इस दौर में

आपको बता दें कि भारत में ऑक्‍सफॉर्ड के साथ मिलकर विकसित की जा रही वैक्‍सीन का ट्रायल भी अंतिम चरण में है। पहले दो ट्रायल के बाद भारत में अब तक कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है जिससे इस वैक्‍सीन पर किसी भी तरह का कोई संदेह जताया जा सके। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉक्‍टर राजन शर्मा का कहना है कि भारतीयों को वैक्‍सीन मुहैया करवाने के लिए सरकार युद्ध स्‍तर पर काम कर रही है। इसको चरणबद्ध तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। किसी भी सफल वैक्‍सीन को शुरुआत में मेडिकल स्‍टाफ को दिया जाना है। इसके लिए सभी मेडिकल स्‍टाफ की सूची सरकार को उपलब्‍ध करवा दी गई है।

फरवरी 2021 तक वैक्‍सीन आने की उम्‍मीद

सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदर पूनावाला का कहना है कि ऑक्‍सफॉर्ड की कोविड-19 वैक्‍सीन फरवरी 2021 तक हैल्‍थ वर्कर्स और बुजुर्गों के लिए मुहैया करवा दी जाएगी। इसके बाद अप्रैल 2021 तक इसको आम जनता के लिए उपलब्‍ध करवाया जाएगा। उनके मुताबिक इसकी दो खुराक की कीमत करीब एक हजार रुपये तक होगी। इसके अलावा जॉनसन एंड जॉनसन, एस्ट्राजेनेका व सैनोफी समेत करीब दस ऐसी वैक्‍सीन हैं जिनका ट्रायल अंतिम फेज में हैं। गौरतलब है कि 90 फीसद से अधिक कारगर वैक्‍सीन को मान्‍यता मिलने की उम्‍मीद काफी अधिक है। फाइजर और मॉडर्ना की वैक्‍सीन के लिए कहा जा रहा है कि ये इमरजेंसी के तहत उपयोग में लाने के लिए अमेरिका में आवेदन कर सकती हैं। अमेरिका से इन कंपनियों को वैक्‍सीन की दस करोड़ खुराक का ऑर्डर पहले ही मिल चुका है वहीं फाइजर को ब्रिटेन, कनाडा, जापान और यूरोपीय संघ से भी ऑर्डर मिला है।

वैक्‍सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है भारत

भारत के ही संदर्भ में यदि बात करें तो स्‍पुतनिक के अंतिम ट्रायल में भारत अहम भूमिका निभा रहा है। स्‍पुतनिक ने दावा किया है कि ये वैक्‍सीन कोविड-19 पर करीब 92 फीसद तक कारगर है। वहीं फाइजर ने अपनी वैक्‍सीन को 95 फीसद तक कारगर बताकर विश्‍व स्‍तर पर बढ़त बनाने का काम किया है। साथ ही भारत ने नोवावैक्‍स की करीब एक अरब खुराक का भी ऑर्डर दे दिया है। हालांकि इस वैक्‍सीन का अंतिम चरण का ट्रायल अभी चल रहा है। इसके अलावा यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि उनकी वैक्‍सीन दिसंबर 2020 के अंत तक उनकी वैक्‍सीन भी आ जाएगी। ईयू कमीशन के अध्‍यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने कहा है कि इस वैक्‍सीन को मॉर्डना और फाइजर कंपनी के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। इसमें जर्मनी की कंपनी बाायेएनटेक भी शामिल है। लेयन के मुताबिक यदि सभी कुछ ठीक रहता है तो यूरोपीयन मेडिसेन एजेंसी इसको मान्‍यता दे देगी। इटली ने जनवरी 2021 तक कोविड-19 की वैक्‍सीन उपलब्‍ध होने की बात कही है। इटली के विशेष आयुक्‍त की मानें तो ईयू परचेज प्रोग्राम के तहत फाइजर कंपनी की  34 लाख वैक्‍सीन की खुराक तक मिल जाएंगी और सितंबर तक सभी का टीकाकरण कर दिया जाएगा।

कोविड-19 के मामले

रॉयटर के आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 के पूरी दुनिया में अब तक 56,542,140 मामले सामने आ चुके हैं। इसकी वजह से अब तक 1,354,227 मरीजों की मौत भी हो चुकी है जबकि 36,537,746 मरीज ठीक भी हुए हैं। भारत की बात करें यहां पर इसके मरीजों की संख्‍या 8,958,483 तक जा पहुंची है और अब तक 131,578 मरीजों की मौत भी हो चुकी है जबकि 8,383,602 मरीज ठीक भी हुए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में अमेरिका विश्‍व में नंबर एक पर है, जहां इसके अब तक 11,549,903 मामले सामने आ चुके हैं और 250,470 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,802,843 मरीज ठीक भी हुए हैं।

वैक्‍सीन ऐसे करेगी काम

कोविड-19 को लेकर विश्‍व में तैयार की जा रही वैक्‍सीन आरएन पर आधारित है। ये वैक्‍सीन शरीर में स्‍पाइक बनाती है जो एंटीबॉडीज पैदा करने के साथ टी-सेल के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। इससे शरीर में मौजूद संक्रमण को ठीक किया जा सकता है। हालांकि नोवावैक्‍स प्रोटीन आधारित वैक्‍सीन है।

 

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