रुपया जमीन और पेट्रोल आसमान पर… आपकी जेब पर ऐसे डाल रहा है असर

 डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दरअसल, डॉलर के मजबूत होने का सीधा प्रभाव घरेलू मार्केट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है. यही वजह है कि एक तरह रुपया जहां औंधे मुंह गिरता दिख रहा है. वहीं, पेट्रोल-डीजल आसमान छू रहे हैं. बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचने के बाद गुरुवार को भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली है. वहीं, रुपये में गिरावट से आज तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में भी 18 पैसे की बढ़ोतरी की है.दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दरअसल, डॉलर के मजबूत होने का सीधा प्रभाव घरेलू मार्केट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है. यही वजह है कि एक तरह रुपया जहां औंधे मुंह गिरता दिख रहा है. वहीं, पेट्रोल-डीजल आसमान छू रहे हैं. बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचने के बाद गुरुवार को भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली है. वहीं, रुपये में गिरावट से आज तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में भी 18 पैसे की बढ़ोतरी की है.  सबसे निचला स्तर छुआ कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 70.81 के स्तर पर पहुंच गया है. करंसी मार्केट खुलने के बाद रुपये में 18 पैसे टूट गया. इससे पहले रुपए की शुरुआत 4 पैसे की कमजोरी के साथ 70.63 के स्तर पर हुई. वहीं, बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 45 पैसे की गिरावट के साथ 70.59 के स्तर पर बंद हुआ था.  एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट अगस्त 2013 के बाद एक दिन में रुपए की यह सबसे बड़ी गिरावट है. इस साल रुपया अबतक 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑयल इम्पोर्टर्स और विदेशी बैंकों की तरफ से सरकारी बैंकों द्वारा बिक्री से रुपया गिर गया.   रुपया और होगा कमजोर नोमुरा के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 72 का स्तर छू सकता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होगा. डॉलर की बढ़ती डिमांड, राजनीतिक अनिश्चितता और यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत से रुपए में और कमजोरी आ सकती है.  आपकी जेब पर पड़ेगा असर 1. पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर पड़ेगा. इंपोर्ट्स को तेल की ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इसकी वजह से तेल कंपनियां रोजाना होने वाली पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो सकता है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है. ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं.  2. बढ़ सकती है महंगाई देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है. ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा. वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे.  3. जरूरत की होगी महंगाई अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे इन प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने की संभावना है.  4. ऑटो की बढ़ेंगी कीमतें ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है. रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं.   किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा. इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है. ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा. इसके अलावा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं

सबसे निचला स्तर छुआ
कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 70.81 के स्तर पर पहुंच गया है. करंसी मार्केट खुलने के बाद रुपये में 18 पैसे टूट गया. इससे पहले रुपए की शुरुआत 4 पैसे की कमजोरी के साथ 70.63 के स्तर पर हुई. वहीं, बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 45 पैसे की गिरावट के साथ 70.59 के स्तर पर बंद हुआ था.

एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट
अगस्त 2013 के बाद एक दिन में रुपए की यह सबसे बड़ी गिरावट है. इस साल रुपया अबतक 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑयल इम्पोर्टर्स और विदेशी बैंकों की तरफ से सरकारी बैंकों द्वारा बिक्री से रुपया गिर गया.

रुपया और होगा कमजोर
नोमुरा के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 72 का स्तर छू सकता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होगा. डॉलर की बढ़ती डिमांड, राजनीतिक अनिश्चितता और यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत से रुपए में और कमजोरी आ सकती है.

आपकी जेब पर पड़ेगा असर
1. पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा
डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर पड़ेगा. इंपोर्ट्स को तेल की ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इसकी वजह से तेल कंपनियां रोजाना होने वाली पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो सकता है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है. ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं.

2. बढ़ सकती है महंगाई
देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है. ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा. वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे.

3. जरूरत की होगी महंगाई
अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे इन प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने की संभावना है.

4. ऑटो की बढ़ेंगी कीमतें
ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है. रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं. 

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा
रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा. इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है. ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा. इसके अलावा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं

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