दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की दोबारा गिरफ्तारी को कोर्ट की मंजूरी, मार्शल लॉ से जुड़े मामले में नया मोड़

सियोल : दक्षिण कोरिया की सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने गुरुवार तड़के देश के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की दोबारा गिरफ्तारी को मंजूरी दे दी। यह गिरफ्तारी दिसंबर में उनके द्वारा थोड़े समय के लिए लगाए गए मार्शल लॉ से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर की गई है। अदालत ने विशेष अभियोजक की उस दलील को स्वीकार किया कि यून सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

यून सुक-योल को राजधानी सियोल के पास स्थित एक डिटेंशन सेंटर में फिर से भेज दिया गया है। गौरतलब है कि मार्च में उन्हें पहले ही रिहा कर दिया गया था, जब अदालत ने जनवरी में उनकी गिरफ्तारी को रद्द कर ट्रायल के दौरान हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं मानी थी।

पूर्व राष्ट्रपति यून के खिलाफ जांच की कमान विशेष अभियोजक चो यून-सुक की टीम संभाल रही है, जो उन पर राजद्रोह, सत्ता के दुरुपयोग, सरकारी कामकाज में बाधा और आधिकारिक दस्तावेजों की हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों में नए मुकदमे दर्ज करने की तैयारी में है।

टीम ने यून से दो बार पूछताछ करने के बाद रविवार को गिरफ्तारी वारंट के लिए आवेदन दायर किया था। यून के वकीलों ने इसे “अत्यधिक और निराधार” बताया था, लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी को जायज ठहराया।

यून को शुरुआती तौर पर 20 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। यदि नए आरोपों में अभियोग तय होते हैं, तो वह 6 महीने तक हिरासत में रह सकते हैं। इस दौरान अदालत प्रारंभिक सुनवाई करेगी। दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल की सजा सुनाई जा सकती है, जिसके बाद मामला उच्च अदालतों तक जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि यून ने पिछले साल 03 दिसंबर को यह कहते हुए मार्शल लॉ घोषित किया था, कि उनके “राष्ट्रविरोधी” उदारवादी विरोधी उनकी नीतियों को बाधित कर रहे हैं। लेकिन यह कदम केवल कुछ ही घंटों में समाप्त हो गया जब सांसदों ने सैनिकों की नाकाबंदी तोड़कर संसद में प्रवेश किया और मार्शल लॉ रद्द करने के लिए मतदान किया।

इसके बाद, 14 दिसंबर को यून को महाभियोग के जरिए सत्ता से हटा दिया गया और 26 जनवरी को उन्हें राजद्रोह का आरोपित बनाते हुए अभियोग दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने संसद और चुनाव कार्यालयों को जबरन अपने नियंत्रण में लेने तथा राजनीतिक विरोधियों को कैद करने की योजना बनाई थी।

इन आरोपों में दोष सिद्ध होने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

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