कांग्रेस को छोड़कर ब्राह्मणों को रिझाने में जुटे सभी दल

कांग्रेस को छोड़कर ब्राह्मणों को रिझाने में जुटे सभी दल
सुरेश बहादुर सिंह

लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जहां सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण मतों को रिझाने में जुट गये हैं वहीं पार्टी में हो रही उपेक्षा से आहत कांग्रेस के कई ब्राह्मण नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। प्रदेश में सभी राजनीतिक दल जिस तरह से ब्राह्मणें को रिझाने में लगे हैं उससे ऐसा लग रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

ब्राह्मण समाज कांग्रेस पार्टी का परम्परागत वोट माना जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से राजनीति ने जो करवट ली उससे ब्राह्मण समुदाय कई राजनीतिक दलों में बिखर गया। कांग्रेस अपने इस परम्परागत वोट को बरकरार रखने में नाकामयाब रही। यही नहीं, अभी भी कांग्रेस पार्टी ब्राह्मण समुदाय के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैयापूर्ण अपनाये हुए है। यही कारण है कि पार्टी के दिग्गज नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद तथा पार्टी के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। श्री प्रसाद भाजपा में शामिल हो गये, हालांकि ललितेशपति ने अभी तक किसी दूसरे दल मेें शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे में साफतौर से लिखा है कि वह पार्टी में हो रहे अपने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से आहत थे।

इन दिग्गज नेताओं के त्यागपत्र के बाद कांग्रेस पार्टी पर ब्राह्मण समुदाय को जोड़ने का भारी दबाव है। कांग्रेस पार्टी के पास उत्तर प्रदेश में  प्रमोद तिवारी एक ऐसा चेहरा है जो ब्राह्मण समुदाय को कांग्रेस पार्टी की तरफ आकर्षित कर सकता है, हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने उनकी बेटी आराधना मिश्रा को कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता बना कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी में ब्राह्मण समुदाय को उचित सम्मान दिया जाएगा।

प्रदेश में विकास दूबे हत्याकांड के बाद से ऐसा माहौल बनाया जा रहा था कि ब्राह्मण समाज सत्तादल से नाराज हो गया है। ब्राह्मणों की इसी नाराजगी का लाभ उठाने के लिए बसपा ने प्रबुद्ध सम्मेलनों का आयोजन किया। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा व उनकी पत्नी ने इन सम्मेलनों के माध्यम से ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने की कवायद प्रारम्भ की। यही नहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस सम्मेलन में शिरकत किया और ब्राह्मणों से अपील की कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बसपा को विजयी बनायें।

समाजवादी पार्टी भी कहां पीछे रहने वाली थी। भगवान परशुराम के नाम पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी। पार्टी के कई ब्राह्मण नेताओं ने सम्मेलनों का आयोजन करके ब्राह्मणों को उनका सम्मान वापस दिलाने की मांग भी की।

भाजपा ने भी इसक्रम में ब्राह्मण समाज को पार्टी में बरकरार रखने की कवायद शुरू कर दी। उसी कवायद के तहत भाजपा नेतृत्व ने कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल कर लिया और उन्हें प्रदेश में ब्राह्मण समाज को भाजपा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंप दी, हालांकि भाजपा ने अभी तक उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी है।

कांग्रेस पार्टी ही एक ऐसी पार्टी है जो अपने परम्परागत ब्राह्मण वोट को जोड़ने में असफल साबित हो रही है। यही नहीं, कांग्रेस पार्टी यह संदेश देने में भी सफल नहीं हो पा रही है कि वहां  ब्राह्मणों का सम्मान सुरक्षित है, हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस को सफलता हासिल करनी है तो उन्हें ब्राह्मण समुदाय को पार्टी से जोड़ना होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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