सरकारी आवास मामला: झारखण्ड में SC का फरमान मानने से इंकार…

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी आवास ने निवास करने के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पद से निवृत्त होने के बाद मुख्यमंत्री भी एक सामान्य नागरिक ही है, इसलिए उन्हें सरकारी आवास में रहने का कोई अधिकार नहीं है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी पूर्व पदाधिकारियों को सरकारी आवास खली करने के निर्देश भी दिए थे.

लेकिन उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी आवास की सुविधा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर झारखंड पर नहीं पड़ेगा. वैसे तो झारखण्ड में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास की सुविधा दी गईं है, लेकिन सिर्फ शिबू सोरेन ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री हैं जिन्हे आजीवन सरकारी निवास की सुविधा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराइ गईं है, यही नहीं राज्य सरकार ने खुद इसकी मंजूरी भी दी है.

हालांकि, शिबू सोरेन को यह सुविधा पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते नहीं बल्कि, झारखण्ड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में उनकी भूमिका को देखते हुए दी गई है, शिबू मोरहाबादी में एक बड़े बंगले में रहते हैं. शिबू सोरेन के बंगले के पास पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा का आवास है, मरांडी ने पूर्व में आवास की सुविधा वापस कर दी थी, लेकिन कुछ माह पूर्व उन्हें स्टेट गेस्ट हाउस के समीप वाला बंगला आवंटित किया गया है, जबकि अर्जुन मुंडा ओल्ड सर्किट हाउस में आरंभ से रहते हैं.

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