जन-विश्वास विधेयक के तीसरे संस्करण से छोटे कारोबारियों को होगा फायदा : पीयूष गोयल

नई दिल्‍ली : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि उनके मंत्रालय ने जन विश्वास विधेयक के तीसरे संस्करण के जरिए छोटे कारोबारी अपराधों को और अपराध-मुक्त करने के लिए काम शुरू कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और मजदूरों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री ने आज नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में कॉन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने पहले ही लगभग 275-300 ऐसे प्रावधानों की पहचान कर ली है, जिन्हें अपराध-मुक्त की श्रेणी में डाला जा सकता है। गोयल ने सुझाव दिया कि व्यापारी समुदाय और ज्यादा प्रावधान की पहचान करके मंत्रालय को उसकी जानकारी दे।

उन्होंने व्यापारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुरु तेग बहादुर के बलिदान को याद किया, जिनकी विरासत को लगभग 350 साल बाद याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बताए आदर्शों पर चलने से देश को गर्व और सम्मान मिलेगा और देश का भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि जिस विज़न के साथ गुरु तेग बहादुर ने देश को एकजुट किया, उसे याद रखना भारत की तरक्की को रास्ता दिखाता रहेगा। श्रम संहिता लागू करने पर उन्होंने कहा कि इसमें श्रमिकों के अनुकूल उपाय हैं, जैसे सभी के लिए समय पर न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा को शामिल किया गया है। इनमें विभिन्न ई-कॉमर्स मंचों के लिए काम करने वाले अस्थायी कर्मी (गिग वर्कर) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि श्रम संहिता से कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।

उन्‍होंने व्यापारियों को स्वदेशी प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। गोयल ने कहा क‍ि सप्लायर्स को प्रोडक्ट पैकेजिंग पर मैन्युफैक्चरिंग की जगह साफ-साफ लिखनी चाहिए और सुझाव दिया कि दुकानें यह दिखा सकती हैं कि वे स्वदेशी सामान बेचते हैं। उन्होंने “मेड इन इंडिया” प्रोडक्ट्स की मौजूदगी बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।

जन विश्वास (प्रावधान में संशोधन) विधेयक को अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया, जिसे एक प्रवर समिति को भेजा गया था। इस कानून का पहला संस्करण 2023 में लागू किया गया था। इसमें 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन के जरिये छोटे अपराधों को अपराध-मुक्त किया गया था।

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