‘नोटबंदी और जीएसटी’ की मार से अर्थव्‍यवस्‍था की चाल हुई धीमी, भारत की रेटिंग माइनस में

नई दिल्ली: क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने शुक्रवार को भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफाल्ट रेटिंग (आईडीआर) को बीबीबी- (माइनस) कर दिया है, जबकि दृष्टिकोण को स्थिर रखा है. फिच ने देश को बीबीबी – रेटिंग 11 साल पहले दी थी. रेटिंग एजेंसी फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्तीय साल 2018-19 में देश की जीडीपी का रेट 7.3 फीसदी रहेगी, जबकि वित्तवर्ष 2019-20 में यह बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी. रेटिंग एजेंसी ने मौजूदा अर्थव्यवस्था की रफ्तार में आई गिरावट की मुख्य वजह नवंबर 2016 में नोटबंदी और जुलाई 2017 में लागू जीएसटी को बताया है. अगले वित्तवर्ष जीडीपी रेट में कुछ सुधार होने का अनुमान जताया है. बता दें कि फिच ने देश को बीबीबी – रेटिंग 11 साल पहले दी थी. बता दें कि फिच ने यह कदम तब उठाया है, जबकि मूडीज ने 14 साल बाद देश की रेटिंग को बेहतर किया है. हालांकि, एसएंडपी ने भी भारत की स्वायत्त रेटिंग को बरकरार रखा था.

कारोबार में सुधार पर अब कठिनाइयां अभी भी
फिच ने कहा है कि भारत की स्वायत्त साख को इस दर्जे में इस लिए रखा गया है , क्योंकि एक तरफ जहां देश की मध्यकालिक आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य मजबूत है और भुगतान संतुलन आदि की स्थिति अनुकूल है, , वहीं दूसरी ओर राजकोषीय स्थिति में कुछ कमजोरियां और पुराने बुनियादी मुद्दे बने हुए हैं, जिनमें संचालन के स्तर और कारोबार के वातावरण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. एजेंसी ने कहा है कि भारत में कारोबार के वातावरण में सुधार हो रहा है पर अब भी कठिनाइयां बनी हुई हैं.

व्यापार वातावरण में हो रहे सुधार
फिच ने कहा, “भारत की रेटिंग मध्यम अवधि के विकास दृष्टिकोण, अनुकूल बाहरी संतुलन के साथ कमोजर राजकोषीय वित्त और कुछ हानिकारक संरचनात्मक कारकों को ध्यान में रखते हुए दी गई, जिसमें सरकार के मानकों और व्यापार वातावरण में हो रहे सुधार को भी ध्यान में रखा गया है.”

आर्थिक विकास दृष्टिकोण बरकरार
फिच ने कहा कि भारत के क्रेडिट प्रोफाइल का समर्थन करने के लिए एक अनुकूल आर्थिक विकास दृष्टिकोण बरकरार है, हालांकि, आधिकारिक प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक 31 मार्च, 2018 को खत्म हुए वित्त वर्ष में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वास्तविक वृद्धि दर गिरकर 6.6 फीसदी रही है, जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में 7.1 फीसदी थी.

2019-20 में यह बढ़कर 7.5 फीसदी होगी
फिच का अनुमान लगाया है कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 फीसदी रहेगी, जबकि वित्तवर्ष 2019-20 में यह बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी, क्योंकि वर्तमान में अर्थव्यवस्था की रफ्तार में आई गिरावट का मुख्य कारण साल 2016 के नवंबर में लागू की गई नोटबंदी और साल 2017 के जुलाई में लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) है.

भारत की रेटिंग बीबीबी- के स्तर पर बरकरार
– वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की स्वायत्त वित्तीय साख का दर्जा स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी -’ श्रेणी में बरकार रखा.
– फिच की निगाह में भारत सरकार के ऋण – पत्र पूंजी लगाने लायक तो हैं पर यह निवेश की न्यूनतम श्रेणी के हैं
– रेटिंग एजेंसी ने ताजा आकलन में कहा है कि मध्यम अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि तेज होने की संभावना मजबूत.
– देश का राजकोषीय वित्तपोषण कमजोर है, लेकिन चालू खाता घाटा की स्थिति अनुकूल
– ‘उभरते बड़े बाजारों में भारत की मध्यम अवधि में वृद्धि की संभावनाएं सबसे मजबूत.

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