शैलजा हत्याकांड: दो दिन में ही हत्या की गुत्थी को सुलझाया

दिल्ली में हाल ही में एक मेजर की पत्नी शैलजा द्विवेदी की हत्या के बाद सनसनी फैल गई. लेकिन उसके बाद जो मोड़ इस काण्ड में आ रहा है वो बेहद ही चौकाने वाला है. दरअसल मेजर की बीवी को मौत के घात उतारने वाला और कोई नहीं बल्कि उसी का दोस्त कर्नल निखिल हांडा का नाम सामने आया जिसके बाद वो अभी सलाखों के पीछे है. दिल्ली में हाल ही में एक मेजर की पत्नी शैलजा द्विवेदी की हत्या के बाद सनसनी फैल गई. लेकिन उसके बाद जो मोड़ इस काण्ड में आ रहा है वो बेहद ही चौकाने वाला है. दरअसल मेजर की बीवी को मौत के घात उतारने वाला और कोई नहीं बल्कि उसी का दोस्त कर्नल निखिल हांडा का नाम सामने आया जिसके बाद वो अभी सलाखों के पीछे है.   दरअसल इस मामले में पुलिस ने मौत के बाद जल्द ही इस बात का खुलासा कर दिया, पुलिस को इस मामले में ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ी. पुलिस ने इस मामले में शैलजा की मौत के बाद जब कालिंग डिटेल चेक की गई तो आखिरी कॉल निखिल हांडा का था तब ही से पुलिस को इस बारे में शक हो गया था. पुलिस ने निखिल हांडा को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया है.   उस दिन दिल्ली आने से पहले मेजर हांडा ने पहले ही हत्या का प्लान बना लिया था. इससे पहले मेजर हांडा को पता चला था कि पैर की चोट की वजह से शैलजा दिल्ली के आर्मी बेस हॉस्पिटल में इलाज करवा रही हैं. हांडा ने भी माइग्रेन की शिकायत लेकर अस्पताल में खुद को एडमिट करा लिया.  शैलजा और निखिल दोनों अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए थे.  शैलजा फिजियोथैरेपी कराने अस्पताल जाती थी. हांडा ने अब अपने बेटे को उसी अस्पताल में भर्ती करा दिया.  कत्ल की सुबह यानि 23 जून को हांडा ने सुबह 8.30 बजे शैलजा को फोन किया. शैलजा फिजियोथैरेपी कराने के लिए 10.30 बजे हॉस्पिटल पहुंची. यहां हांडा पहले से ही कार लेकर मौजूद था. शैलजा ने अपने ड्राइवर को जाने के लिए कह दिया. वह हांडा की कार में बैठी और उसके साथ चली गई. उसके के बाद ही निखिल हांडा ने मेट्रो स्टेशन के पास शैलजा को मौत के घात उतार दिया. इतना ही नहीं उसके बाद निखिल हांडा ने शैलजा को खुद की गाड़ी से कुचल भी दिया जिसके बाद उसकी मौत हो गई.   आसपास के लोगों ने जब मेट्रो स्टेशन के पास शैलजा की लाश देखी तो उन्हें एक्सीडेंट का शक हुआ जिसके बाद पुलिस को सुचना दी गई. हालाँकि बाद में पुलिस के आने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, वहीं शव देखकर ही पुलिस को इस बात शक हो गया था कि मामला एक्सीडेंट नहीं हत्या का है.

दरअसल इस मामले में पुलिस ने मौत के बाद जल्द ही इस बात का खुलासा कर दिया, पुलिस को इस मामले में ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ी. पुलिस ने इस मामले में शैलजा की मौत के बाद जब कालिंग डिटेल चेक की गई तो आखिरी कॉल निखिल हांडा का था तब ही से पुलिस को इस बारे में शक हो गया था. पुलिस ने निखिल हांडा को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया है. 

उस दिन दिल्ली आने से पहले मेजर हांडा ने पहले ही हत्या का प्लान बना लिया था. इससे पहले मेजर हांडा को पता चला था कि पैर की चोट की वजह से शैलजा दिल्ली के आर्मी बेस हॉस्पिटल में इलाज करवा रही हैं. हांडा ने भी माइग्रेन की शिकायत लेकर अस्पताल में खुद को एडमिट करा लिया.  शैलजा और निखिल दोनों अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए थे.  शैलजा फिजियोथैरेपी कराने अस्पताल जाती थी. हांडा ने अब अपने बेटे को उसी अस्पताल में भर्ती करा दिया.

कत्ल की सुबह यानि 23 जून को हांडा ने सुबह 8.30 बजे शैलजा को फोन किया. शैलजा फिजियोथैरेपी कराने के लिए 10.30 बजे हॉस्पिटल पहुंची. यहां हांडा पहले से ही कार लेकर मौजूद था. शैलजा ने अपने ड्राइवर को जाने के लिए कह दिया. वह हांडा की कार में बैठी और उसके साथ चली गई. उसके के बाद ही निखिल हांडा ने मेट्रो स्टेशन के पास शैलजा को मौत के घात उतार दिया. इतना ही नहीं उसके बाद निखिल हांडा ने शैलजा को खुद की गाड़ी से कुचल भी दिया जिसके बाद उसकी मौत हो गई. 

आसपास के लोगों ने जब मेट्रो स्टेशन के पास शैलजा की लाश देखी तो उन्हें एक्सीडेंट का शक हुआ जिसके बाद पुलिस को सुचना दी गई. हालाँकि बाद में पुलिस के आने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, वहीं शव देखकर ही पुलिस को इस बात शक हो गया था कि मामला एक्सीडेंट नहीं हत्या का है.

Loading...
IGNITED MINDS