जीएसटी 2.0 सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि एक नई क्रांति है: निरंजन हीरानंदानी

मुंबई : हीरानंदानी समूह के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने गुरुवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 2.0 में हुए ताजा बदलाव की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा उठाया गया एक साहसिक और परिवर्तनकारी कदम बताया।

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में हीरानंदानी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में घोषणा की थी कि दिवाली से पहले कुछ क्रांतिकारी होगा। उन्होंने इसे पूरा किया है। यह सिर्फ एक सुधार नहीं, बल्कि एक क्रांति है।

उन्होंने नए जीएसटी 2.0 ढांचे की प्रशंसा की, जिसमें केवल दो कर स्लैब की शुरुआत और तंबाकू व सॉफ्ट ड्रिंक जैसी हानिकारक मानी जाने वाली वस्तुओं पर 40 प्रतिशत तक का सिन टैक्ल लगाने का फैसला किया गया है। साथ ही, आवश्यक निर्माण वस्तुओं पर जीएसटी घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि नया कर ढांचा आम जनता को सीधी राहत देता है।

जिन वस्तुओं पर पहले 12 प्रतिशत कर लगता था। उन पर टैक्स को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, हानिकारक उत्पादों पर कर में वृद्धि उचित ही है।

हीरानंदानी ने दवाओं पर जीएसटी हटाने की खास तौर पर सराहना की।

यह एक बेहद जरूरी कदम है। बहुत से लोग, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग, स्वास्थ्य सेवा के खर्चों से जूझते हैं। दवाओं पर जीएसटी हटाना एक मजबूत और संवेदनशील कदम है।

उन्होंने सरकार की सिन गुड्स के विचार के लिए भी प्रशंसा की।

उन्होंने आगे कहा, जो वस्तुएं लोगों के लिए हानिकारक हैं और उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं हैं, उन पर 40 प्रतिशत कर लगाया गया है, जो अच्छी बात है क्योंकि इसका उद्देश्य यह है कि लोग इन्हें कम खरीदें।

जीएसटी परिषद द्वारा भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में ऐतिहासिक बदलावों को मंजूरी दिए जाने के बाद, 22 सितंबर से कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी।

बुधवार को अपनाए गए नए कर ढांचे में अब दो प्रमुख स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत हैं। वहीं, हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स 40 प्रतिशत है।

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