नई दिल्ली : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना में ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में विरार और बोईसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी पहाड़ी सुरंग (माउंटेन टनल-5) में सफल ब्रेकथ्रू हासिल कर लिया गया है। यह महाराष्ट्र में परियोजना की पहली पर्वतीय सुरंग है। रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना 15 अगस्त 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य है।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को यहां रेल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना के लिए मील का पत्थर है। उन्होंने कहा, “इस ब्रेकथ्रू के साथ ठाणे से अहमदाबाद तक का पूरा सेक्शन अब साफ हो गया है। केवल मुंबई-ठाणे के बीच समुद्र के नीचे का हिस्सा शेष है।”
रेल मंत्री ने बताया कि माउंटेन टनल-5 पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में शामिल है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से की गई और अत्याधुनिक ‘ड्रिल एंड ब्लास्ट’ तकनीक का उपयोग करते हुए 18 महीनों में कार्य पूरा किया गया। इस तकनीक से खुदाई के दौरान जमीन की स्थिति की रियल टाइम निगरानी संभव होती है और आवश्यकता के अनुसार शॉटक्रीट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर जैसे सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा मानकों, वेंटिलेशन और अग्नि सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया गया।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ठाणे और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच लगभग पांच किलोमीटर लंबी पहली भूमिगत सुरंग का निर्माण सितंबर 2025 में पूरा हो चुका है। कुल 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना में 27.4 किलोमीटर लंबी सुरंगें शामिल हैं, जिनमें 21 किलोमीटर भूमिगत और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें हैं। इस परियोजना में कुल आठ पर्वतीय सुरंगें हैं, जिनमें से सात महाराष्ट्र में (करीब 6.05 किलोमीटर) और एक 350 मीटर लंबी सुरंग गुजरात में स्थित है।
रेल मंत्री ने बताया कि `इस परियोजना में कुल 12 स्टेशन होंगे। इनमें मुंबई (बीकेसी), ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। साबरमती अहमदाबाद क्षेत्र का टर्मिनल स्टेशन होगा, जबकि मुंबई में बीकेसी टर्मिनल रहेगा। सामान्यतः 508 किलोमीटर के कॉरिडोर के लिए दो डिपो पर्याप्त होते, लेकिन पूर्ववर्ती महाराष्ट्र सरकार के दौरान अनुमतियों में देरी के कारण तीन डिपो बनाने पड़े।’
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि `जापानी तकनीक पर आधारित यह बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी और मुंबई से अहमदाबाद की यात्रा को वर्तमान 7-8 घंटे से घटाकर लगभग 1 घंटा 58 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह परियोजना मध्यम वर्ग के लिए किफायती, आरामदायक और तेज़ यात्रा का विकल्प प्रदान करेगी।’
परियोजना के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर प्रकाश डालते हुए रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाएगी। उन्होंने कहा कि कई देशों ने पर्यावरणीय कारणों से बुलेट ट्रेन परियोजनाएं अपनाई हैं और भारत में भी इसके दूरगामी आर्थिक लाभ होंगे। यह परियोजना कॉरिडोर के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी, रोजगार सृजन करेगी और नए औद्योगिक तथा आईटी हब के विकास में सहायक होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा नई कार्यप्रणालियों को अपनाने और गुणवत्ता व तकनीक में नए मानक स्थापित करने पर जोर दिया है। बुलेट ट्रेन परियोजना उसी दृष्टिकोण का उदाहरण है। रेल मंत्री ने जानकारी दी कि `यह परियोजना 15 अगस्त 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में सूरत–बिलीमोरा, उसके बाद वापी–सूरत, फिर वापी–अहमदाबाद, ठाणे–अहमदाबाद और अंत में मुंबई–अहमदाबाद सेक्शन को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।’
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