लखनऊ: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सामाजिक समरसता अभियान को और तेज करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत हाल के दिनों में जहां जातिगत विभाजन की घटनाएं सामने आई हैं, वहां सभी जातियों के लोगों के साथ ‘सहभोज’ (सामुदायिक भोज) आयोजित किए जाएंगे।
VHP सूत्रों के अनुसार, संगठन ने दलित समाज तक पहुंच मजबूत करने के लिए संत रविदास, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे प्रमुख दलित महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन आयोजनों के जरिए संगठन ‘समाजिक समरसता’ का संदेश देकर हिंदू समाज को एकजुट करने की कोशिश करेगा।
संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं से सभी जातियों और समुदायों के लोगों को इन कार्यक्रमों में शामिल कराने का आह्वान किया है। पश्चिम बंगाल में जहां अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस पहल को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
यह कदम RSS की ओर से सामाजिक समरसता को लेकर की गई उच्च-स्तरीय अपील के बाद उठाया गया है। RSS अपने शताब्दी वर्ष के तहत सामाजिक परिवर्तन के पांच स्तंभों पर जोर दे रहा है, जिनमें सामाजिक समरसता के साथ ‘कुटुंब प्रबोधन’ (परिवार जागरण), ‘पर्यावरण’ जागरूकता, ‘स्व’ (स्वत्व) पर बल और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं।
विहिप के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, “ संत रविदास, फुले और आंबेडकर जैसे प्रतीकों को केंद्र में लाना दलित समाज से संवाद बढ़ाने की रणनीति का संकेत है एक ऐसा क्षेत्र, जिस पर परंपरागत रूप से गैर-केसरिया विचारधाराओं का प्रभाव रहा है।”
विशेषज्ञों के मुताबिक, विहिप की यह पहल उस राजनीतिक चुनौती की पृष्ठभूमि में है, जहां विपक्ष की ‘PDA’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) रणनीति ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें 62 से घटाकर 33 कर दी थीं।
गौरतलब है कि विहिप ने इससे पहले अक्टूबर 2024 में वाल्मीकि जयंती से पहले भी इसी तरह का अभियान चलाया था। चार दिवसीय इस अभियान के तहत देशभर में 10,000 स्थानों पर ‘सहभोज’, ‘कन्या पूजन’ और ‘समरसता यज्ञ’ आयोजित किए गए थे। अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 500 स्थानों पर दलित समुदाय तक पहुंच बनाई गई थी।
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