देश दासत्व की मानसिकता छोड़ आगे बढ़ रहा है: धर्मेंद्र प्रधान

नागपुर : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत अब ‘मैकाले मानसिकता’ से बाहर निकलकर अपनी संस्कृति, आत्म सम्मान और स्वाभिमान को आगे बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है।

 

प्रधान ने यह बयान नागपुर स्थित भोंसला मिलिट्री स्कूल के 27वें वार्षिक समारोह में शामिल होने के दौरान दिया। उन्होंने इस अवसर पर मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान टी.बी. मैकाले द्वारा लागू की गई शिक्षा नीति का उद्देश्य देश को मानसिक रूप से कमजोर बनाए रखना था। इसके विकल्प के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत वर्ष 2020 में लागू नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी की भावना को जागृत करती है।

 

इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रधान ने नागपुर स्थित दीक्षाभूमि का दौरा कर भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के विचार, संघर्ष और देश के प्रति योगदान सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बाबासाहेब से जुड़े स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया है।

 

प्रधान ने बाद में डॉ. आबाजी थत्ते सेवा एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा स्थापित ‘नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट’ (एनसीआई) का भी दौरा किया। उन्होंने इस संस्थान की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि यह कम लागत में कैंसर रोगियों को मानवीय और समग्र उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और कैंसर उपचार, अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बन रहा है।

 

अपने नागपुर प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्मृति मंदिर का दौरा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन युगद्रष्टाओं के त्याग और निःस्वार्थ सेवा ने देश के युवाओं को राष्ट्रभक्ति और अनुशासन की प्रेरणा दी है।

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