कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग पर कड़ा हमला बोला। कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2026 के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने समाज के सभी वर्गों से नामी हस्तियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भेजे गए सुनवाई नोटिसों के खिलाफ एकजुट आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कारणों के चलते अब तक 110 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह प्रक्रिया चलाई जा रही है, उससे आम लोगों को भारी असुविधा हो रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची के मसौदे पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान लोगों को औसतन चार से पांच घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस परेशानी पर ध्यान नहीं दिया।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में “तार्किक विसंगति” की अवधारणा पहले कभी किसी भी राज्य में लागू नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा, “यह व्यवस्था केवल पश्चिम बंगाल के लिए लाई गई है। देश के किसी अन्य राज्य में ऐसा नहीं हो रहा है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, कवि जय गोस्वामी सहित कई सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्तियों को जिस तरीके से सुनवाई के नोटिस भेजे गए, वह बेहद अनिश्चित और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “पहले जनता तय करती थी कि सत्ता में कौन आएगा। अब निर्वाचन आयोग यह तय कर रहा है कि वोट कौन देगा। यह स्थिति नहीं चल सकती। इसके खिलाफ सभी को विरोध करना चाहिए। याद रखिए, अगर पड़ोसी के घर में आग लगी हो तो कोई भी चुप नहीं रह सकता। इसलिए इसके खिलाफ एकजुट आंदोलन होना जरूरी है।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब तक उनकी लिखी 135 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों में मैं और भी कई किताबें लिखूंगी। उनमें से एक किताब निश्चित रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर लोगों को हो रही परेशानियों पर होगी।”
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