लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 77वें गणतंत्र दिवस पर सोमवार को अपने सरकारी आवास पर झंडा फहराया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति खुद को न्याय, संविधान व व्यवस्था से ऊपर मानता है तो वह भारत के संविधान की अवमानना करता है। कोई व्यक्ति यह कहेगा कि मैं जो कहूंगा, वही सही है, यह नहीं चल सकता।
योगी ने कहा कि 1950 में आज ही के दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 76 वर्ष की इस यात्रा में संविधान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक प्रत्येक भारतवासी के गौरव, भारत की एकात्मता और अखंडता के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हम सब नए भारत का दर्शन कर रहे हैं तो इसमें संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ जोड़ने की प्रेरणा देता है।
योगी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा के निर्माण के उपरांत 26 नवंबर 1949 को भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया। आज पूरा देश 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में आयोजित करता है।
योगी ने कहा कि हर भारतवासी का दायित्व बनता है कि हम अपने संविधान के प्रति श्रद्धा व समर्पण भाव से कार्य करें, क्योंकि सम-विषम परिस्थितियों में यह देश का संबल बना है। संविधान की पंक्ति “हम भारत के लोग” हर भारतवासी के लिए प्रेरणा है। भारत के संविधान का असली संरक्षक कोई है, तो यहां का नागरिक है।
उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों के प्रति हर संस्था, मंत्रालयों व विभागों को अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। यह संविधान के प्रति हमारे समर्पण के भाव को व्यक्त करता है।
योगी ने कहा कि पीएम मोदी कहते हैं कि इन तीन शब्दों ने भारत के संविधान को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित करने में सबसे बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है। आजादी के पूर्व देश को सामाजिक रूप से तोड़ने के लिए अनेक दुष्चक्र प्रारंभ हुए थे।
उन्होंने कहा कि देश को विभाजित करने के लिए भाषाई, क्षेत्र व जाति के आधार पर अनेक षडयंत्र रचे गए थे, लेकिन ये षडयंत्र अधिक दिन तक टिक नहीं पाए। जब भी संविधान के मूल भाव को कमजोर करने की साजिश होती है तो कहीं न कहीं से एक सुगबुगाहट भी शुरू हो जाती है। यह उन भावों को कमजोर करती है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हों। भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ जोड़ने की नई प्रेरणा देता है।
योगी ने राष्ट्रनायकों के ध्येय ‘राष्ट्र प्रथम’ का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रथम भाव का दस्तावेज संविधान के रूप में हमारे सामने है। यह देश के संकल्पों को आगे बढ़ाने में मददगार होगा।
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