नई दिल्ली : दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में 25वें भारत रंग महोत्सव 2026 के तहत मंगलवार को पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बाल संगम’ आयोजित किया गया। इस उत्सव का आयोजन एनएसडी की थिएटर इन एजुकेशन’ कंपनी (संस्कार रंग टोली) ने किया। इसका उद्घाटन भारत 24 के प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक डॉ. जगदीश चंद्रा ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप डॉ. चंद्रा ने कहा कि ओटीटी और डिजिटल मनोरंजन के दौर में जहां पारंपरिक कलाएं पीछे छूटती दिख रही थीं, वहीं ‘बाल रंगमंच’ और ‘बाल संगम’ जैसे आयोजनों में उमड़ी भारी भीड़ ने एक नई उम्मीद जगाई है। यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि भारत एक बार फिर अपनी जड़ों, प्राचीन संस्कृति, नृत्य और साहित्य की ओर लौट रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की उन जमीनी प्रतिभाओं को, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, आप मुख्यधारा में ला रहे हैं। प्रधानमंत्री जी के ‘ग्रासरूट टैलेंट’ के विजन को साकार करते हुए आपका यह मंच इन कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मिलन बिंदु साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि मंच पर उपस्थित कलाकारों का उत्साह और उनके बड़े सपने सराहनीय हैं।
डॉ चंद्रा ने सभी से आग्रह किया कि पूर्वोत्तर से आये प्रतिभागियों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्हें कार्यात्मक समर्थन के साथ-साथ भावनात्मक समर्थन भी दिया जाए ताकि वे खुद को यहां अजनबी महसूस न करें। वे दिल्ली की धरती पर भी खुद को मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करें।
विशिष्ट अतिथि के रूप में फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सवों को देखकर गर्व की अनुभूति होती है कि हम उस भारतवर्ष का अभिन्न अंग हैं, जो सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। ये समारोह न केवल हमारी परंपराओं का उत्सव हैं बल्कि हमारी महान विरासत की जीवंत पुष्टि और प्रत्यक्ष प्रमाण भी हैं।
एनएसडी टीआईई के प्रमुख रिकाॅन नगाेमले ने बताया कि बाल संगम न केवल मनोरंजन का साधन है बल्कि यह बच्चों को अपनी जड़ों और विविध भारतीय संस्कृतियों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने की और रिकाॅन नगाेमले ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
उद्घाटन समारोह के बाद अजीत चौधरी के निर्देशन में लोक प्रदर्शनों का एक शानदार ‘कोलाज’ प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बाल संगम’ का यह उत्सव 10-14 फरवरी 2026 तक चलेगा। हर शाम 6:00 बजे से दर्शकों को भारत की समृद्ध लोक विरासत देखने को मिलेगी। इस पांच दिवसीय महोत्सव में देश के अलग- अलग क्षेत्रों के नन्हे कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इस मौके पर असम का सिफुंग हरिमु अफाद द्वारा ‘बागुरुम्बा’, पंजाब का पंजाब फोक आर्ट सेंटर द्वारा ‘भांगड़ा’, ओडिशा का आराधना नृत्य अकादमी द्वारा ‘गोटीपुआ’, मिज़ोरम का लिली वेंग कल्चरल क्लब द्वारा ‘चेराव’ नृत्य, केरल का सत्वम कलारी संगम द्वारा ‘कलारीपयट्टू’ (मार्शल आर्ट) और गुजरात का कालराव सेवा ट्रस्ट द्वारा ‘गरबा’ और ‘डांडिया रास’ की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा राजस्थान का लंगा मांगणियार, तेलंगाना का ओग्गु डोलू और त्रिपुरा का होजागिरी नृत्य भी इस उत्सव की रौनक बढ़ाएंगे।
—————
Shaurya Times | शौर्य टाइम्स Latest Hindi News Portal