टेक्सटाइल सेक्टर पर सरकार का यू-टर्न : India-US डील में विपक्ष के विरोध के बाद बदला टैरिफ

New Delhi : भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर सरकार के रुख में बदलाव के संकेत मिले हैं। विपक्ष के विरोध और संसद में उठे सवालों के बीच अब केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि अंतिम समझौते में भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य टैरिफ की सुविधा मिल सकती है। इसे सरकार का यू-टर्न माना जा रहा है, जो देश के कपड़ा निर्यातकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

 

टेक्सटाइल निर्यात को मिल सकती है बड़ी बढ़त

 

पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि जिस प्रकार अमेरिका ने बांग्लादेश को विशेष व्यापारिक सुविधा दी है, उसी तरह भारत को भी समान लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका से कच्चा माल खरीदा जाता है, उसे भारत में प्रोसेस कर तैयार परिधान या कपड़े के रूप में निर्यात किया जाता है, तो उस पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।

 

यह व्यवस्था लागू होने पर भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। अभी तक अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों को आशंका थी कि बांग्लादेश को मिलने वाली रियायतों से भारत का टेक्सटाइल सेक्टर नुकसान में आ सकता है। लेकिन अब सरकार के इस संकेत से उद्योग जगत में राहत की भावना है।

 

अंतरिम फ्रेमवर्क में नहीं, अंतिम समझौते में शामिल होगा प्रावधान

 

गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रावधान पिछले सप्ताह जारी अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Framework) का हिस्सा नहीं हो सकता, लेकिन इसे अंतिम व्यापक समझौते में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारा व्यापार समझौता अभी तैयार हो रहा है। जब यह अंतिम रूप ले लेगा, तब इसकी सभी बारीकियां सामने आएंगी।”

 

इस बयान से यह साफ है कि दोनों देशों के बीच वार्ता अंतिम चरण में है और टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर सकारात्मक प्रगति हो रही है।

 

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

 

इस बीच, इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी जारी है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका समझौता अमेरिका के सामने “आत्मसमर्पण” जैसा है और इससे बांग्लादेश को भारत से अधिक लाभ मिला है।

 

पीयूष गोयल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार देश के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत कर रही है और भारत को भी वही सुविधाएं मिलेंगी जो अन्य प्रतिस्पर्धी देशों को दी गई हैं।

 

उद्योग जगत को क्या होगा फायदा?

 

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ‘0’ टैरिफ की व्यवस्था लागू होती है तो:

भारतीय रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे

निर्यात में तेज वृद्धि की संभावना बनेगी

लाखों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ेगी

“मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” को मजबूती मिलेगी

अमेरिका भारत का प्रमुख निर्यात बाजार है और टेक्सटाइल सेक्टर देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यह संभावित रियायत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

आगे क्या?

 

अब नजर इस बात पर है कि अंतिम व्यापार समझौते पर कब हस्ताक्षर होते हैं और उसमें टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े प्रावधान किस रूप में शामिल किए जाते हैं। यदि सरकार के संकेत हकीकत में बदलते हैं, तो भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है।

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