नई दिल्ली : केंद्र सरकार के दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास केंद्र- सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट) ने क्वांटम सुरक्षा को मजबूती देने के लिए शनिवार को सिनर्जी क्वांटम इंडिया के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों संस्थान मिलकर एक ऐसा ऑटोमेटेड टूल बनाएंगे जो उपकरणों में मौजूद उन एल्गोरिदम को खोज निकालेगा जिन्हें भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से खतरा हो सकता है।
सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि सिनर्जी क्वांटम के साथ यह सहयोग भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। हम सी-डीओटी की दूरसंचार और क्वांटम अनुसंधान विशेषज्ञता को सिनर्जी क्वांटम की क्षमताओं के साथ मिलकर एक ऐसा उपकरण बनाना चाहते हैं जो वर्तमान और भविष्य की साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्मार्ट स्कैनर बनाना है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के खतरों को देखते हुए किसी भी डिवाइस की वर्तमान सुरक्षा कमियों को उजागर करे और उसे सुरक्षित बनाने का रास्ता बताए। इसमें वेब एप्लिकेशन, सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट और कंट्रोल सॉफ्टवेयर मॉड्यूल शामिल होंगे।
सिनर्जी क्वांटम इंडिया के सह-संस्थापक और सीईओ जय ओबेराय ने कहा कि सी-डॉट के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया जाने वाला स्वचालित उपकरण सरकार, रक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना क्षेत्रों में संगठनों को क्वांटम-संबंधित क्रिप्टोग्राफिक जोखिमों का आकलन और निवारण करने में सक्षम बनाएगा। क्वांटम साइबर सुरक्षा में वैश्विक नेता के रूप में भारत के उदय में योगदान देना हमारे लिए सम्मान की बात है।
इस मौके पर सी-डॉट की ईवीपी शिखा श्रीवास्तव, जय ओबेराय (सह-संस्थापक और सीईओ), विपिन राठी (सह-संस्थापक) और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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