नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात उपायों की घोषणा की है। इनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता एवं वैकल्पिक व्यापार साधनों को समर्थन शामिल है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के तहत सात अतिरिक्त उपायों का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर पीयूष गोयल ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समावेशी विकास, वंचित लोगों का सशक्तिकरण और भारत के त्वरित गति से हुए रूपांतरण में पीछे छूट गए लोगों को अवसर प्रदान करना सच्चे सामाजिक न्याय की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है। आरबीआई/आईएफएससीए से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से किए गए पात्र लेनदेन पर फैक्टरिंग लागत पर 2.75 फीसदी की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सहायता की अधिकतम सीमा प्रति एमएसएमई 50 लाख रुपये सालाना है और पारदर्शिता और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए इसे डिजिटल दावा तंत्र के माध्यम से संसाधित किया जाएगा।
डिजिटल चैनलों का उपयोग करने वाले निर्यातकों को सहयोग देने के लिए, ब्याज सब्सिडी और आंशिक ऋण गारंटी के साथ संरचित ऋण सुविधाएं आरंभ की जा रही हैं। डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। ओवरसीज इन्वेंटरी क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 75 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 5 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति आवेदक 15 लाख रुपये की वार्षिक सीमा के अधीन, 2.75 फीसदी की ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी।
टीआरएसीई निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन और अन्य अनुरूपता आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। पात्र परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन व्यय के लिए सकारात्मक सूची के तहत 60 फीसदी और प्राथमिकता सकारात्मक सूची के तहत 75 फीसदी की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति आईईसी 25 लाख रुपये की वार्षिक सीमा के अधीन है। एफएलओडब्ल्यू निर्यातकों को ओवरसीज वेयरहाउसिंग और फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच बनाने में सहायता करता है, जिसमें वैश्विक वितरण नेटवर्क से जुड़े ई-कॉमर्स निर्यात हब शामिल हैं। स्वीकृत परियोजना लागत के 30 प्रतिशत तक की सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी, जो निर्धारित सीमाओं और एमएसएमई भागीदारी मानदंडों के अधीन है।
एलआईएफटी निम्न निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली भौगोलिक कठिनाइयों को कम करता है। पात्र माल ढुलाई व्यय के 30 प्रतिशत तक की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति वित्तीय वर्ष प्रति निर्यातक के लिए 20 लाख रुपये की सीमा के अधीन होगी। इनसाइट, निर्यातकों की क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करता है, ‘जिलों को निर्यात केंद्र’ पहल के तहत जिलों और क्लस्टर स्तर पर सुविधा प्रदान करता है, और व्यापार खुफिया प्रणालियों का विकास करता है। वित्तीय सहायता परियोजना लागत के 50 फीसदी तक है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों और विदेशों में भारतीय दूतावासों से प्राप्त प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100 फीसदी तक सहायता प्रदान की जाती है।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक राज्य सरकारों, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों में एफआईईओ, ईईपीसी, जीजेईपीसी, सीआईआई, एफआईसीआई, पीएचडीसीसीआई, एसोचैम और नैसकॉम ने इस पहल का स्वागत किया और इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समर्थन व्यक्त किया। इन उपायों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी उपस्थित थे।
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