कोलकाता में केंद्रीय कृषि मंत्री ने जूट, जल प्रबंधन व मत्स्य क्षेत्र में सुधार पर दिया जोर

कोलकाता : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलकाता स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों की व्यापक समीक्षा बैठक की। साेमवार काे हुई इस बैठक में जूट क्षेत्र को सशक्त बनाने, कृषि की स्थिरता बढ़ाने और मत्स्य आधारित ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने जूट उद्योग को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों की समीक्षा की, जिनमें कच्चे जूट की गुणवत्ता, ग्रेडिंग प्रणाली और किसानों को प्रभावित करने वाली जल संकट जैसी समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने ग्रेडिंग की सटीकता सुधारने, उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कुल उत्पादकता बढ़ाने के लिए समाधान विकसित करने पर जोर दिया।

 

शिवराज सिंह चौहान ने जूट उत्पादों में विविधता लाने और निर्यात अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि मूल्य संवर्धित जूट उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक प्राकृतिक रेशे के बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद करेंगे। इसके लिए उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, उद्योग के हितधारकों और सरकारी एजेंसियों के समेकित दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई।

 

केंद्रीय मंत्री ने जूट उत्पादन क्षेत्रों में जल संकट को कम करने और सतत खेती सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी जल प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने इनपुट लागत कम करने और फाइबर गुणवत्ता बढ़ाने में तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक हस्तक्षेप की अहमियत को रेखांकित किया।

 

बैठक में मत्स्य क्षेत्र को ग्रामीण आजीविका के प्रमुख स्त्रोत के रूप में बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मंत्री ने आंतरिक मत्स्य पालन, सतत एक्वाकल्चर प्रथाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसानों की आय और पोषण सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

 

बैठक में कोलकाता में कार्यरत कई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थानों और क्षेत्रीय केंद्रों के कार्यों की समीक्षा की गई, जिनमें प्राकृतिक रेशे अनुसंधान, जूट और संबद्ध रेशे, आंतरिक मत्स्य पालन और कृषि प्रौद्योगिकी प्रसार में लगे संस्थान शामिल हैं। प्रमुख संस्थानों में राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशे अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान, केंद्रीय जूट और संबद्ध रेशे अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय आंतरिक मत्स्य पालन अनुसंधान संस्थान और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जोन पांच शामिल हैं।

 

ये संस्थान प्राकृतिक रेशों, उन्नत जूट किस्मों के विकास, आंतरिक मत्स्य पालन प्रबंधन और किसानों तक कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मंत्री ने सरकार की कृषि अनुसंधान को मजबूत करने, किसानों का समर्थन करने और नवाचार, विविधीकरण और समेकित विकास रणनीतियों के माध्यम से सतत ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।———————

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