ट्रंप की घर वापसी स्कीम में ताजमहल की फोटो पर बवाल: मनीष तिवारी बोले- भारतीयों का अपमान कर रहा अमेरिका, सरकार दे कड़ा जवाब

नई दिल्ली : अमेरिका में अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए शुरू की गई ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ (स्वैच्छिक निर्वासन) योजना अब एक बड़े कूटनीतिक विवाद में तब्दील हो गई है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा इस अभियान के प्रचार के लिए भारत की शान ‘ताजमहल’ की तस्वीर का इस्तेमाल करने पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कड़ी आपत्ति जताई है। तिवारी ने केंद्र सरकार से इस मामले में चुप्पी तोड़ने और अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग की है।

 

क्या है पूरा विवाद? ताजमहल की फोटो और ‘एग्जिट बोनस’

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मार्च 2026 में अवैध प्रवासियों के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसके तहत प्रवासियों को खुद अमेरिका छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। योजना के लुभावने विज्ञापनों में फ्री हवाई टिकट और 2,600 डॉलर (करीब 2.2 लाख रुपये) का ‘एग्जिट बोनस’ देने की बात कही गई है। विवाद तब शुरू हुआ जब 17 मार्च को DHS ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट किया, जिसमें ताजमहल की फोटो लगाकर लिखा गया आप घर लौट सकते हैं और नई शुरुआत कर सकते हैं।

 

मनीष तिवारी का हमला: ‘हथकड़ी और बेड़ियों में भेजे जा रहे भारतीय’

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए मनीष तिवारी ने इस अभियान को भारतीयों की गरिमा पर चोट बताया। उन्होंने कहा, “जब भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया जाता है, तो उन्हें हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर अमानवीय तरीके से भेजा जाता है। यहां तक कि 80 साल की बुजुर्ग महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया, लेकिन भारत सरकार चुप रही।” तिवारी ने सीधे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से सवाल किया कि क्या सरकार अब भी इस ‘अपमानजनक’ विज्ञापन पर चुप रहेगी?

 

ट्रंप प्रशासन की ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ स्कीम की हकीकत

अमेरिका के इस नए अभियान का उद्देश्य बिना गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई के प्रवासियों को वापस भेजना है। सरकार इसे ‘नई शुरुआत’ का नाम दे रही है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि ताजमहल जैसी सांस्कृतिक धरोहरों का इस्तेमाल कर प्रवासियों को निशाना बनाना नस्लीय और अपमानजनक है। मनीष तिवारी ने मांग की है कि भारत सरकार को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी से इस तस्वीर को तुरंत हटाने और स्पष्टीकरण देने को कहना चाहिए।

 

कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विज्ञापन से भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ सकती है। सोशल मीडिया पर भी भारतीय यूजर्स ताजमहल की फोटो के इस्तेमाल को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ताजमहल भारत की पहचान है और इसे ‘निर्वासन’ जैसे नकारात्मक अभियान से जोड़ना पूरी तरह गलत है। अब सबकी नजरें विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

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