सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण, अयोध्या में रामनवमी पर होगा 1251 कुण्डीय महायज्ञ

अयोध्या : भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या एक बार फिर इतिहास के स्वर्णिम पलों की साक्षी बनने जा रही है। यहां 20 से 28 मार्च तक यहां 1251 कुण्डीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह हनुमत्-श्रीराम महायज्ञ हाेगा। यह एक यज्ञ न केवल एक धार्मिक आयोजन होगा, बल्कि वैदिक परंपरा और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक भी बनेगा।

 

आयोजन के संयोजक महायज्ञ समिति के अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के वैश्विक संदेश को पुनः स्थापित करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि से उठने वाली यह आस्था की ध्वनि पूरे विश्व में सनातन के मूल्यों को पहुंचाएगी। रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को वैदिक विधि-विधान से मनाया जाएगा। इस दौरान भजन-कीर्तन, संतों के प्रवचन और धार्मिक कथाएं पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देंगी। सनातन परंपरा के बल पर आध्यात्मिक महाशक्ति भारत फिर विश्वगुरु बनेगा।

 

दरअसल, अयोध्या में होने वाला यह महायज्ञ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस सनातन परंपरा का पुनर्स्मरण है, जिसने भारत को युगों तक आध्यात्मिक विश्वगुरु बनाए रखा। अब एक बार फिर रामनगरी से वही ज्योति प्रज्वलित होने जा रही है, जो आस्था, संस्कृति और मानवता का मार्ग आलोकित करेगी।

 

उल्लेखनीय है क रामनवमी के पावन पर्व के साथ होने वाला यह आयोजन उस गौरवशाली परंपरा को जीवंत करेगा, जब यज्ञ, तप और भक्ति भारत की आत्मा हुआ करते थे। 1251 कुण्डों में एक साथ दी जाने वाली आहुतियां पूरे वातावरण को वैदिक मंत्रों से गुंजायमान करेंगी, मानो त्रेता युग की स्मृतियां पुनः साकार हो उठें। इस महाआयोजन के साथ श्रीरामानुजाचार्य सहस्त्राब्दी जयंती महोत्सव भी मनाया जाएगा, जिनकी शिक्षाओं ने भारतीय भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी और समाज को भक्ति, समर्पण और समरसता का संदेश दिया। महायज्ञ में प्रमुख रूप से लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी की पावन उपस्थिति रहेगी। उनके सान्निध्य में वैदिक अनुष्ठान, कथा-प्रवचन और गुरु परंपरा का वंदन श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की गहराई से जोड़ने का कार्य करेगा।

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