‘मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई हमारी जंग नहीं है’, मोदी सरकार के समर्थन में कांग्रेस नेता ने कहा- हम सही दिशा में हैं

Iran Israel War : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि भारत इस संघर्ष में एक सीमित भूमिका निभा रहा है और सरकार का सतर्क एवं सावधानीपूर्ण रुख बिल्कुल सही है।

 

मनीष तिवारी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में सिर्फ एक युद्ध नहीं चल रहा है, बल्कि यहां अनेक संघर्ष एक साथ हो रहे हैं। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच की स्थिति केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि बड़े वैश्विक समीकरणों से भी जुड़ी है, और यह भारत की लड़ाई नहीं है।

 

“हम सही दिशा में हैं”

मनीष तिवारी ने आगे कहा, “यह समझना जरूरी है कि यहां केवल एक युद्ध नहीं है, बल्कि कई संघर्ष साथ-साथ चल रहे हैं। भारत को अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ बनाए रखनी चाहिए। यदि हम सोच-समझकर और सावधानी से कदम उठाते हैं, तो हम सही दिशा में हैं। रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है अपने हितों की रक्षा करना और परिस्थिति के अनुसार संतुलन बनाकर चलना।” इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी सरकार के रुख की सराहना की है। उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखा कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही नहीं ठहराया जा सकता और यह संप्रभुता तथा गैर-आक्रामकता के सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत हमेशा समर्थन करता आया है।

 

बता दें कि इस पूरे संकट के दौरान भारत ने लगातार बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है। भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा किए गए हमलों की निंदा की और साथ ही तेहरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं। खासतौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम बना हुआ है।

 

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों और ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए। इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। इस नीति का समर्थन अब कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं ने भी किया है, जो यह दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति के दिशा-निर्देशों को राष्ट्रीय हित में सही माना जा रहा है।

 

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भारत की सीमित भूमिका और सतर्क विदेश नीति का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में कई संघर्ष साथ-साथ हो रहे हैं, और यह भारत की लड़ाई नहीं है।

भारत ने कूटनीति और बातचीत पर जोर दिया है, विशेष रूप से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए।

यह सावधानीपूर्ण नीति पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।

कांग्रेस के शशि थरूर ने भी सरकार के रुख की सराहना की, और कहा कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

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