नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में दमकल विभाग की लेटलतीफी के चलते पालम अग्निकांड में एक ही परिवार के करीबन 9 सदस्यों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया है। बता दें कि द्वारका जिले में स्थित पालम अग्निकांड में एक ही परिवार के 9 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो जाने से शहर के लोगों सदमें से उभर नहीं पा रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे में 3 मासूम बच्चियां भी शामिल हैं। इस दर्दनाक हादसे ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि कई विभाग अधिकारियों की लापरवाही के कारण एक परिवार के सदस्यों को अपनी जान गंवानी पड़ गई है, लेकिन परिवार के बाकी सदस्य अभी तक सदमें में हैं। इसी बीच क्षेत्रीय दुकानदारों का आरोप है कि इस हादसे के जिम्मेदार दमकल विभाग अधिकारी हैं, क्योंकि दमकल विभाग की टीम मौके पर समय से नहीं पहुंच पाई थी, जिस समय दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच पाई थी। तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। इस हादसे में परिवार के अनेकों सदस्य जलकर नष्ट हो गए, लेकिन दमकल विभाग को इन बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसी बीच मार्केट के कुछ लोगों का आरोप है कि बाजार के अंदर अतिक्रमण की भरमार समस्या बनी रहती है। बाजार के अंदर से 2 पहिया वाहन तक नहीं निकल पाते हैं। साथ ही पहले मेन रोड पर खड़े वाहनों के कारण का जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में अगर कोई घटना घटती है, तो सुरक्षा बचाव करना बेहद की मुश्किल हो सकता है। बता दें कि राजधानी दिल्ली शहर के हर जिले में दमकल विभाग के स्टेशन पॉइंट बने हुए हैं। साथ ही प्रत्येक स्टेशन प्वाइंटों पर फायर ट्रक भी तैनात किए है, ताकि आग सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़िया मौके पर पहुंच सकें, सूत्रों के अनुसार, द्वारका जिले के पालम अग्निकांड में दमकल विभाग की पोल खुल गई है। बता दें कि दमकल विभाग को आग लगने की सूचना तड़के सुबह 7 बजे के आसपास लगी थी। घटना की सूचना मिलने के बाद भी टीमे मौके पर लेट पहुच पाई थी, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर खाक हो गया था। जांच का विषय यह है कि पालम अग्निकांड में 4 बहूमंजिला इमारत तक फायर ट्रक की सीढ़िया कैसे नहीं पहुंच पाई थी, जबकि फायर ट्रक में सीढ़ियों की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिससे आपातकालीन में 4-5 बहूमंजिला इमारतों तक फायर ट्रक में जॉइंट सीढ़ियो के माध्यम से पहुचा जा सके, ताकि आग पर नियंत्रण पा लिया जाए, लेकिन पालम अग्निकांड में फायर ट्रक की सीढ़िया 4 बहूमंजिला इमारत नहीं पहुंच पाई थी, जिस कारण आग पर काबू पा बहुत ही मुश्किल हो गया था। दमकल विभाग की लापरवाही के कारण एक ही परिवार के सदस्यों को अपनी जान गंवानी पड़ गई, अगर दमकल विभाग के स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की जाए, तो मामले का खुलासा हो पाएगा है कि आग लगने की घटना विभाग को किस समय प्राप्त हुई थी और सूचना मिलते ही टीम किस समय निकल पाई थी। खास बात यह है कि इस फायर ट्रक में पानी की टंकी और पंप लगा होता है, जोकि आग बुझाने के लिए पानी की बौछार करता हैं। साथ ही फायर ट्रक सहायक वाहन होते हैं, जो बड़ी मात्रा में पानी या फोम लेकर चलते हैं। इनमें ऊंची इमारतों तक पहुंचने के लिए लंबी, हाइड्रोलिक सीढ़ी भी लगी होती है। इसी तरह फायर ट्रक रस्सियों व काटने वाले उपकरणों और अन्य तकनीकी बचाव सामान से लैस होते हैं। ये विशेष रूप से डिजाइन किए गए आपातकालीन वाहन होते हैं, जोकि अग्निशमन कर्मियों, पानी, होज़ (पाइप) और आग बुझाने के अन्य उपकरणों को घटनास्थल तक ले जाते हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बढ़ती आग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मिनी फायर ट्रको को लॉन्च किया था, ताकि शहर में तंग गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आग पर काबू पाया जा सकें, इन वाहनों का उपयोग दिल्ली फायर सर्विसेज द्वारा आग की घटनाओं में तेजी से कार्रवाई करने के लिए किया जा रहा है। बता दें कि इन मिनी फायर ट्रकों को लॉन्च करने का मकसद यह है कि दिल्ली शहर में संकरी गलियों में आग बुझाने में मदद मिल सके, दिल्ली सरकार लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है, लेकिन दमकल विभाग लोगों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है, इसलिए लोगों को आग में जलकर अपने प्रमाण त्याग रहे.
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