Sachin Tendulkar : भारतीय क्रिकेट के महान पूर्व कप्तान और ऑलराउंडर कपिल देव ने अपने विचारों में मौजूदा क्रिकेटरों और युवा खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा है कि खिलाड़ी अपने शरीर को समझें और उसके अनुसार मेहनत करें, क्योंकि बिना अपने शारीरिक क्षमता को समझे किसी दूसरे का अनुसरण करना नुकसानदायक हो सकता है। कपिल का यह बयान आज के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि हर व्यक्ति अलग है और उसकी क्षमताएँ भी।
कपिल देव ने यह बात भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मैनेजर अमृत माथुर के साथ प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक की साझेदारी के मौके पर कही। उन्होंने वर्कलोड मैनेजमेंट के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि अब के कोच साइंटिफिक तरीके अपनाते हैं, जिनके अनुसार खिलाड़ियों को अधिक गेंदबाजी या बल्लेबाजी करने से पहले उसकी सीमा का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमने जो सीखा था कि जितनी नेट पर गेंदबाजी करोगे, उतना ही अच्छा खिलाड़ी बनोगे। लेकिन आज के कोच कहते हैं कि 18 गेंदों से ज्यादा नहीं फेंकना चाहिए। यदि आप चार ओवर गेंदबाजी करोगे और फिर 10 ओवर डालने पड़ जाएं, तो चोट लगना स्वाभाविक है।”
कपिल ने आगे कहा, “साइंस अच्छा है, मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन अपने शरीर को समझना जरूरी है। 90 प्रतिशत क्रिकेटर अपने शरीर को समझते नहीं हैं और सोचते हैं कि वे कर सकते हैं, तो क्यों नहीं कर सकते। हर कोई अलग है। जैसे दारा सिंह वजन उठा सकते थे, वैसे हर कोई नहीं कर सकता।” उनका यह संदेश है कि खिलाड़ियों को अपने शरीर की क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए और उसी के अनुसार मेहनत करनी चाहिए।
सचिन तेंदुलकर का उल्लेख करते हुए कपिल देव ने कहा कि हर किसी को उनके जैसे जीनियस के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “सचिन का करियर भारत के लिए बेहद खास है। उन्होंने 16 साल की उम्र में नवंबर 1989 में अपना पहला मैच खेला था। उनका सफर एक महान बल्लेबाज बनने तक पहुंचा। वह विश्व के पहले और इकलौते बल्लेबाज हैं जिन्होंने शतक का शतक जड़ा है।”
कपिल ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अलग है और सभी का जीनियस होना जरूरी नहीं। उन्होंने कहा, “आप जिनियस लोगों की बराबरी नहीं कर सकते और न ही करनी चाहिए। विराट कोहली काफी कड़ी मेहनत करते हैं, वजन उठाते हैं। यदि आप उनके अनुसरण में बहुत अधिक मेहनत करेंगे तो चोटिल हो सकते हैं। हर किसी की अपनी सीमा होती है, और हमें उसे समझना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग बिना अपनी क्षमता को समझे दूसरों के पीछे भागते हैं, इससे नुकसान होता है। “हम अपने आप को नहीं समझते, और दूसरे क्या कर रहे हैं, यह देखकर अपनी तुलना कर लेते हैं। सचिन जैसे महान खिलाड़ी ने भी सबको गलत संदेश दिया कि 15-16 साल की उम्र में खेलना संभव है, लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं है। हर व्यक्ति का अपने आप को समझना और उसी के अनुसार मेहनत करना जरूरी है।”
कपिल देव का यह बयान आज के युवा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि सफलता का रास्ता अपने शरीर और क्षमता को समझने से ही शुरू होता है। हर किसी का जीन, शारीरिक संरचना और क्षमता अलग है, इसलिए उन्हें अपनी सीमाओं का सम्मान करते हुए मेहनत करनी चाहिए।
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