लाल किला विस्फोट मामले में एनआईए की जम्मू-कश्मीर में नौ ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए बम विस्फोट मामले की जांच के तहत सोमवार को जम्मू-कश्मीर में 9 ठिकानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने इस दौरान कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

 

एनआईए के अनुसार यह तलाशी अभियान राज्य के श्रीनगर, बारामूला, जम्मू, कुलगाम, गांदरबल और हंदवाड़ा जिलों में चलाया गया। इन छापेमारियों के दौरान संदिग्ध ठिकानों, संदिग्ध व्यक्तियों के आवासों और उनके संपर्क में रहने वाले लोगों के परिसरों की गहन जांच की गई। एजेंसी ने विशेष रूप से डिजिटल साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया, जिनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। इन उपकरणों के माध्यम से आतंकी नेटवर्क, फंडिंग चैनल और संचार तंत्र से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

 

सूत्रों के मुताबिक, एनआईए को जांच के दौरान कुछ ऐसे इनपुट मिले थे, जिनके आधार पर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय या छिपे नेटवर्क के कनेक्शन सामने आए। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर यह समन्वित कार्रवाई की गई। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में सीमा पार से किसी प्रकार की मदद या निर्देश शामिल थे।

 

जांच एजेंसी ने बताया कि अब तक इस मामले में 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच को दिशा मिली है। एजेंसी अब इन आरोपितों के आपसी संबंधों, उनके फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और डिजिटल कम्युनिकेशन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

 

यह विस्फोट 10 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय राजधानी में हुआ था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में कई लोगों की मौत हो गई थी और अनेक घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था और व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया था।

 

इस हमले का मुख्य आरोपित उमर उन नबी भी विस्फोट में मारा गया था। एनआईए की जांच में सामने आया है कि उमर उन नबी इस पूरे हमले का मास्टरमाइंड था और उसने सह-आरोपितों तथा अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। उसने हमले की योजना बनाने, संसाधन जुटाने और क्रियान्वयन के लिए एक संगठित नेटवर्क का उपयोग किया।

 

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपितों ने हमले से पहले कई बार स्थान की रेकी की थी और सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया था। इसके अलावा, विस्फोट में इस्तेमाल किए गए उपकरणों और सामग्री के स्रोत की भी जांच की जा रही है, ताकि सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके।

 

एनआईए अब इस हमले के पीछे की व्यापक साजिश को उजागर करने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह एक बड़ा आतंकी मॉड्यूल था, जो देश के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय हो सकता है।

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