नई दिल्ली : राज्य सभा ने बुधवार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े कानून में संशोधन करने वाला ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक लोकसभा में मंगलवार को पहले ही पारित किया जा चुका है। राज्यसभा में इसे ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान द्रमुक सांसद तिरुची शिवा ने विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमिटी में भेजने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सदन ने खारिज कर दिया। चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय के अस्तित्व का नहीं, बल्कि भेदभाव का मुद्दा है।
उन्होंने पूछा कि जब
संविधान आज ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ खड़ा है। वे सुप्रीम कोर्ट में हैं, पुलिस में हैं और खेलों में देश के लिए पदक जीत रहे हैं। फिर सरकार उन पर नए कानून क्यों थोप रही है?
द्रमुक सांसद तिरुची शिवा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि भले ही सरकार इसे बहुमत से पारित करा ले, लेकिन यह अंततः सुप्रीम कोर्ट में निरस्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक
“यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन करता है, जिससे ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वतंत्रता, गरिमा और स्व-निर्धारण के अधिकार प्रभावित होते हैं।” सांसद स्वाति मालिवाल ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न में कम सजा का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं के मामले में न्यूनतम 10 साल की सजा है, वहीं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अधिकतम सजा केवल 2 साल है, जो गंभीर असमानता है।
मालीवाल ने विधेयक के प्रावधानों पर भी सवाल उठाते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजने और ट्रांसजेंडर समुदाय से व्यापक परामर्श की मांग की।
सपा सांसद जया बच्चन ने कहा कि विधेयक से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय का दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व जरूरी है।
बजट सत्र के दौरान विधेयक लाना “संवेदनाहीन” कदम है।
“हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव की बात कर रहे हैं। यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव है। सरकार सिर्फ आगामी चुनावों के लिए वोट बैंक तैयार करना चाहती है?”
सांसद फौजिया खान ने कहा कि विधेयक में बदलाव से ट्रांसजेंडर अधिकारों का कमजोर करेगा जो चिंता का विषय है।
विकसित भारत का नारा चयनात्मक भारत नहीं होना चाहिए।”
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और अलगाव का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि
“हमारी सरकार का मानना है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के लिए हर व्यक्ति के मुक्ति और सशक्तिकरण की दिशा में काम करना है।
मंत्री ने कहा कि संशोधन में उनकी पहचान की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया गया है और भेद भाव रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं। 2019 के कानून में ट्रांसजेंडर की परिभाषा को पुनः परिभाषित किया गया ताकि इसे कानूनी सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है क्योंकि समाज में अभी भी बहुत भेदभाव मौजूद है। सरकार का लक्ष्य ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करना और समान अधिकार देना है।
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