“मैं और मेरा” की भावना ही युद्धों का मूल कारण: मोहन भागवत

बेलगावी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में होने वाले अधिकांश युद्धों की जड़ “मैं और मेरा” की भावना है। उन्होंने यह बात कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिक्कोडी तालुका के यडूर गांव में आयोजित एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

 

इस दौरान मोहन भागवत ने वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान-इजराइल संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष रूस-यूक्रेन युद्ध जितना पुराना नहीं है, लेकिन इसके दीर्घकालिक होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि विश्व की समस्याओं का समाधान “मानव धर्म” और हिंदू धर्म के मूल्यों में निहित है। भारत सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है और वैश्विक शांति का संदेश दे रहा है।

 

हिंदू समाज की विविधता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पूजा-पद्धति, खान-पान और परंपराओं में भिन्नता होने के बावजूद समाज प्राचीन काल से एकजुट रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू समाज में किसी को जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोई परंपरा नहीं रही है।

 

कार्यक्रम का आयोजन यडूर स्थित श्री काडदेवर मठ में किया गया, जहां श्रीशैल जगद्गुरु चन्नरामसिद्ध श्री के नेतृत्व में गौ-तुलाभार संपन्न हुआ। इस अवसर पर मोहन भागवत ने गौ-पूजा कर गायों को चारा भी खिलाया।

 

युवा सम्मेलन में बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।————–

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