तेहरान : पश्चिम एशिया (Midit East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे देश युद्ध विराम के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका की ‘अव्यावहारिक’ शर्तों के आगे झुकने वाला नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल भंडारों और बिजली संयंत्रों को पूरी तरह नष्ट करने की खुली चेतावनी दे दी है।
ईरान का पाकिस्तान को दोटूक: ‘हमें मध्यस्थों की जरूरत नहीं’
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई हमानेह ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। हमानेह ने पाकिस्तान द्वारा आयोजित सुलह के मंच पर तंज कसते हुए कहा, “पाकिस्तान का मंच उनका अपना है, ईरान ने उसमें भाग नहीं लिया है। क्षेत्र में युद्ध खत्म करने की अपील का हम स्वागत करते हैं, लेकिन दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस खूनी संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।” उन्होंने साफ किया कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका केवल ऐसी मांगें भेज रहा है जिन्हें मानना मुमकिन नहीं है।
ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ पर गर्जना: ‘खर्ग द्वीप को बना देंगे खंडहर’
ईरान के अड़ियल रुख के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान शुरू करेगा।
ट्रंप ने लिखा, हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और रणनीतिक ‘खर्ग द्वीप’ को पूरी तरह तबाह कर देंगे। हमने इन्हें अब तक जानबूझकर छुआ नहीं है, लेकिन अब सब्र का बांध टूट रहा है।” ट्रंप ने इसे पिछले 47 वर्षों के ‘ईरानी आतंक’ का बदला बताया है।
खर्ग द्वीप: क्यों ट्रंप के निशाने पर है ईरान का यह हिस्सा?
खर्ग द्वीप ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात टर्मिनल है। ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल इसी द्वीप के जरिए दुनिया के बाजारों में पहुंचता है। अगर अमेरिका खर्ग द्वीप पर हमला करता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है।
बदलती अमेरिकी कूटनीति बनाम ईरान का अडिग रुख
ईरानी प्रवक्ता हमानेह ने कहा कि अमेरिका की कूटनीति मौसम की तरह बदलती रहती है, लेकिन ईरान अपने सिद्धांतों पर कायम है। उन्होंने अमेरिका की मांगों को ‘अत्यधिक और अव्यावहारिक’ करार दिया। फिलहाल स्थिति यह है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के शांति प्रयास ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे हैं, क्योंकि न तो ईरान पीछे हटने को तैयार है और न ही अमेरिका अपने कड़े तेवर ढीले कर रहा है।
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