सेमीकंडक्टर प्लांट 14 महीनों में तैयार हुआ, भारत बनेगा वैश्विक हब: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली : केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को अहमदाबाद के साणंद जीआईडीसी स्थित केयन्स सेमीकॉन संयंत्र के उद्घाटन अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के हर इंजीनियर का सपना साकार हो रहा है और भारत तेजी से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है।

 

उन्होंने कहा कि महज 14 महीनों में फाउंडेशन से लेकर कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत होना प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य सरकार के सतत प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

वैष्णव ने बताया कि 28 फरवरी को पहले प्लांट का उद्घाटन हुआ था, जबकि 31 मार्च को दूसरे प्लांट का शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि जुलाई तक तीसरा प्लांट भी शुरू हो जाएगा। वर्ष 2026 तक चार सेमीकंडक्टर प्लांट तैयार हो जाएंगे और 2027 तक दो और प्लांट शुरू होंगे। इसके अलावा, धोलेरा में भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैक्ट्री 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है।

 

उन्होंने गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धा पर जोर देते हुए कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर टिके रहने के लिए इन दोनों पहलुओं में श्रेष्ठता हासिल करनी होगी। उन्होंने बताया कि देश में करीब 60,000 इंजीनियरों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स जैसे सिपनोपिस और केडेंस पर प्रशिक्षण दिया गया है और 315 विश्वविद्यालयों में यह क्षमता विकसित की जा रही है।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज दुनिया की अग्रणी कंपनियां भारत में 2 नैनोमीटर तक की अत्याधुनिक चिप्स का डिजाइन कर रही हैं। “डिजाइन इन इंडिया” और “मेक इन इंडिया” के तहत पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम देश में विकसित हो रहा है।

 

उन्होंने आगे कहा कि “सेमीकॉन 2.0” के तहत प्रधानमंत्री ने स्पष्ट दिशा दी है कि सेमीकंडक्टर से जुड़े केमिकल्स, गैसेस और मशीनरी का निर्माण भी भारत में ही होना चाहिए, ताकि देश पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बन सके।

 

वैष्णव ने विश्वास जताया कि वर्ष 2032 तक भारत दुनिया के शीर्ष छह सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होगा और 2047 तक शीर्ष तीन देशों में अपनी जगह बनाएगा।

 

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