प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश रचने और कांग्रेस नेताओं की हत्या में भूमिका निभाने वाले माओवादी प्रशांत बोस का निधन

रांची : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की साजिश रचने और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं की हत्या में अहम भूमिका निभाने वाले भाकपा (माओवादी) का शीर्ष सदस्य एवं 1 करोड़ के इनामी रहे प्रशांत बोस की लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में मौत हो गई। जेल महानिरीक्षक (आईजी) सुदर्शन मंडल ने प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के मौत की पुष्टि की है।

 

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रशांत बोस की भूमिका पूणे के भीमा कोरेगांव हिंसा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में थी। एनआईए की चार्जशीट में भी बोस का नाम सामने आया था। वहीं, छतीसगढ़ में साल 2013 में बस्तर संभाग के झीरम घाटी में सलवा जुड़ूम के खिलाफ विद्याचरण शुक्ल, नंदकिशोर पटेल, दिनेश पटेल, महेंद्र करमा सहित 30 कांग्रेस नेताओं की हत्या की वारदात को अंजाम देने की मंजूरी प्रशांत बोस ने ही दी थी।

 

दरअसल, 12 नवंबर 2021 में सेंट्रल कमिटी के सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा को झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने संयुक्त अभियान में सरायकेला के कांड्रा इलाके से पुलिस चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया था। प्रशांत बोस के साथ उनकी पत्नी शिला मरांडी और अन्य चार अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

 

वर्ष 2021 में प्रशांत बोस और उसकी पत्नी को गिरफ्तारी के बाद वह रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद था। तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशांत को इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल लाया गया था, जहां उसकी मौत हो गई।

 

केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी ने प्रशांत बोस सहित अन्य के गिरिडीह के पारसनाथ से सरायकेला लौटने की जानकारी दी थी। इसके बाद सरायकेला पुलिस ने एक स्कार्पियो गाड़ी से प्रशांत बोस, शीला मरांडी, प्रशांत बोस के प्राटेक्शन दस्ता के एक सदस्य और कुरियर का काम करने वाले एक युवक को मुंडरी टोल नाका के पास से गिरफ्तार किया था। झारखंड पुलिस ने प्रशांत बोस पर एक करोड़ का ईनाम रखा था। प्रशांत बोस पर झारखंड में 70 से अधिक मामले दर्ज थे।

 

प्रशांत बोस के पास ईआरबी के सचिव के तौर पर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के झारखंड के सीमावर्ती इलाके, असम सहित पूर्वोतर के राज्यों का प्रभार था। साल 2004 में एमसीसीआई व पीडब्लूजी के विलय के पूर्व वह एमसीसीआई का प्रमुख था। विलय के बाद भाकपा माओवादी संगठन में कोटेश्वर राव को प्रमुख बनाया गया था, जबकि बतौर ईआरबी सचिव तब से प्रशांत बोस संगठन में सेकेंड इन कमान था। झारखंड में पारसनाथ, सारंडा, ओडिशा और बंगाल के सीमावर्ती इलाके में प्रशांत बोस ने ही संगठन को खड़ा किया था। प्रशांत बोस मूलत: पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के यादवपुर का रहने वाला था।

 

भाकपा माओवादियों के सेकंड इन कमान प्रशांत बोस की मौत से भारत में नक्सलवाद का बड़ा अध्याय समाप्त हो गया। झारखंड के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा, तत्कालीन आईजी अभियान अमोल वी होमकर और आईबी की संयुक्त कार्रवाई में साल 2021 में प्रशांत बोस को सरायकेला के कांड्रा से गिरफ्तार किया गया था।

 

उस समय प्रेस वार्ता में तत्कलीन डीजीपी नीरज सिन्हा ने बताया था कि प्रशांत बोस ने पूछताछ में माओवादी संगठन के बारे में बहुत सारी महत्वपूर्ण सूचनाएं दी । तत्कालीन डीजीपी नीरज सिन्हा के अनुसार, प्रशांत बोस भाकपा माओवादी संगठन के जनक की भूमिका में था। पांच दशकों की सक्रियता के कारण प्रशांत बोस पर झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, छतीसगढ़ सहित कई राज्यों में केस दर्ज हैं।

 

बतौर सेकंड इन कमान देश के सारे बड़े कांडों को प्रशांत बोस ने मंजूरी दी थी। प्रशांत बोस के खिलाफ झारखंड में 70 जबकि पत्नी शीला मरांडी के खिलाफ 18 नक्सल कांड दर्ज हैं।

 

प्रशांत बोस 60 के दशक में पढ़ाई के दौरान कोलकाता में नक्सली संगठन के मजदूर यूनियन से जुड़ा था। एमसीसीआई के संस्थापक कन्हाई चटर्जी के साथ मिलकर प्रशांत बोस ने संताली नेताओं की ओर से चलाए जा रहे महाजनी और जमींदारी प्रताड़ना के खिलाफ आंदोलन में भागीदारी की बाद में रतिलाल मुर्मू के साथ मिलकर प्रशांत बोस ने सनलाइट सेना का गठन किया और एमसीसीआई को कई जिलों में मजबूत बनाया।

 

संयुक्त बिहार में रणवीर सेना, ब्रह्मर्षि सेना के खिलाफ एमसीसीआई को मजबूत किया गया। साल 1974 में प्रशांत बोस को पुलिस की ओर से गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेजा गया था। 1978 में जेल से छूटने के बाद प्रशांत बोस फिर से एमसीसीआई में सक्रिय हो गया। 2004 में एमसीसीआई के पीडब्लूजी में विलय के बाद प्रशांत बोस को ईआरबी का प्रमुख बनाया गया था। माओवादी थिंक टैंक के तौर पर प्रशांत बोस देशभर के तमाम बड़े माओवादी वारदातों की सहमति व योजना में शामिल रहा था।

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