महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव से कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार का नाम वापस लिया

मुंबई : महाराष्ट्र के बारामती विधान सभा उपचुनाव से कांग्रेस ने आज गुरुवार को अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन यह घोषणा की गई, जिससे अब इस चुनाव के निर्विरोध होने की संभावना बन गई है।हालांकि अभी कई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

 

खास बात यह रही कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेताओं के बार-बार अनुरोध के बावजूद निर्णय न लेने वाले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक फोन के बाद यह फैसला ले लिया गया। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सपकाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि कांग्रेस बारामती उपचुनाव से अपना उम्मीदवार वापस ले रही है।

 

आज सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हर्षवर्धन सपकाल से बात की थी। इसके बाद सपकाल ने तुरंत दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से संपर्क कर राज्य के सभी दलों की भावनाएं हाईकमान तक पहुंचाईं। फिर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि कांग्रेस बारामती उपचुनाव से अपना उम्मीदवार का नाम वापस ले रही है।

 

इसी दौरान बीड दौरे पर मौजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सपकाल ने अच्छा निर्णय लिया है। बारामती उपचुनाव निर्विरोध हो, इसके लिए मैंने उन्हें सुबह ही फोन किया था। तभी से मुझे विश्वास था कि वे जरूर सकारात्मक निर्णय लेंगे।” इस फैसले के बाद अब बारामती उपचुनाव के निर्विरोध होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

 

वहीं पवार परिवार की ओर से भी लगातार कोशिशें जारी थीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले और विधायक रोहित पवार ने भी इस दिशा में सक्रिय प्रयास किए। लेकिन दिल्ली स्थित कांग्रेस नेतृत्व से अनुमति न मिलने के कारण प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे, जिससे चुनाव निर्विरोध होगा या नहीं, इस पर संशय बना हुआ था।

 

गौरतलब है कि अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से नामांकन दाखिल किया है। महाराष्ट्र की परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके परिवार का सदस्य उपचुनाव लड़ रहा हो तो अन्य दल आमतौर पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारते। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए अधिकांश राजनीतिक दल चाहते थे कि यह चुनाव निर्विरोध हो। हालांकि, कांग्रेस ने शुरुआत में बारामती से उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया था और इस उपचुनाव के लिए आकाश मोरे को टिकट दिया था। चुनाव को निर्विरोध बनाने के लिए महायुति के कई वरिष्ठ नेता प्रयासरत थे।

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