नई दिल्ली: उत्तर भारत में इस साल कुदरत के तेवर कुछ जुदा ही नजर आ रहे हैं। जहां अमूमन अप्रैल की शुरुआत में सूरज की तपिश पसीने छुड़ा देती थी, वहीं इस बार मार्च की शुरुआत जैसी भीषण गर्मी अब तक नदारद रही। लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने मौसम का मिजाज ऐसा बदला कि तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़का रहा। लेकिन, अब दिल्ली-NCR से लेकर यूपी-बिहार तक गर्मी अपना असली रंग दिखाने को तैयार है। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो ठंडी हवाओं का दौर अब धीरे-धीरे थमेगा और सूरज के तेवर तल्ख होंगे।
मैदानी इलाकों में हवाओं का जोर, रविवार से चढ़ेगा पारा
आज यानी शनिवार, 11 अप्रैल को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। इन हवाओं के कारण फिलहाल लोगों को चिलचिलाती धूप से राहत मिलेगी और तापमान में अचानक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। राजधानी दिल्ली में आज आसमान बिल्कुल साफ रहेगा। हालांकि, रविवार से पारे में उछाल आना शुरू होगा और अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस को छू सकता है। गनीमत यह है कि सुबह और शाम के समय चलने वाली ठंडी हवाएं फिलहाल दिल्लीवासियों को झुलसने वाली गर्मी से बचाए रखेंगी।
यूपी में 15 अप्रैल के बाद ‘लू’ का अलर्ट, किसानों को बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश के मौसम में भी बड़ा बदलाव आने वाला है। अब राज्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है और खिली हुई चटख धूप तापमान को 38 डिग्री सेल्सियस तक ले जाएगी। सबसे बड़ी चेतावनी 15 अप्रैल के बाद के लिए है, जब यूपी के कई हिस्सों में ‘हीट वेव’ यानी लू चलने के आसार बन रहे हैं। हालांकि, बारिश का रुकना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बेमौसम बरसात से गेहूं की फसल को जो नुकसान हुआ था, अब तेज धूप निकलने से उसकी कटाई और सुखाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी 12 अप्रैल से लू का असर दिखने लगेगा।
पहाड़ों में अब भी सुहाना मौसम, बर्फबारी का दौर जारी
एक तरफ जहां मैदानी इलाके धीरे-धीरे तपने लगे हैं, वहीं पहाड़ी राज्यों में अभी भी मौसम खुशनुमा बना हुआ है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में छिटपुट बर्फबारी और हल्की बारिश ने ठंडक बरकरार रखी है। हिमाचल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान को बढ़ने नहीं दे रही हैं, जबकि पहाड़ों के मैदानी हिस्सों में मौसम अब शुष्क होने लगा है।
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