कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई हैं। इस समय वह मुख्यमंत्री पद पर नहीं हैं, लेकिन उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अब भी उनकी पहचान “मुख्यमंत्री” के रूप में दर्ज है। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यपाल के निर्देश और विधानसभा भंग होने के बाद भी ममता बनर्जी का सोशल मीडिया पर “मुख्यमंत्री” पद का उल्लेख बनाए रखना संवैधानिक मर्यादाओं पर सवाल खड़ा करता है। इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।
ममता बनर्जी पहले ही चुनाव परिणामों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि यह जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश का परिणाम है और वह चुनाव नहीं हारी हैं। इसी कारण उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से भी इनकार किया था। हालांकि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद गुरुवार को राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ममता बनर्जी के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर “मुख्यमंत्री” शब्द बने रहना केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी माना जा सकता है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि, वर्ष 2011 में ममता बनर्जी ने 34 वर्षों के वाम शासन को समाप्त कर पश्चिम बंगाल की सत्ता संभाली थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने चुनाव परिणाम को स्वीकार करते हुए बिना किसी विवाद के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से माना था कि जनता ने मतदान के जरिए अपना फैसला सुना दिया है।
अब 2026 में एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज है और राज्य की राजनीति नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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