मैड्रिड (स्पेन) : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस शनिवार को स्पेन के कैनरी द्वीप समूह के टेनेरिफ पहुंचे। वह यहां डच क्रूज शिप में फंसे 100 से ज्यादा लोगों को निकालने के मुश्किल काम की देखरेख करने आए। इस क्रूज शिप पर दुर्लभ और जानलेवा हंटा वायरस फैल गया था। उन्होंने कैनरी आइलैंड्स में लोगों को भी संबोधित भी किया। डॉ. टेड्रोस ने कहा कि यह शिप अपने सबसे बड़े आइलैंड के तट के पास लंगर डालेगा। 2020 में वैश्विक कोरोना वायरस महामारी के दौरान दुनिया ने जो अनुभव किया, उसके बाद लोगों की चिंता जायज है। उन्होंने कहा, बावजूद इसके घबराने की जरूरत नहीं। हंटा वायरस ‘कोविड नहीं’ है।
सीबीसएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, टेड्रोस ने यहां पहुंचने से पहले लिखे अपने एक पत्र को कैनरी आइलैंड्स में दोहराया। उन्होंने कहा, “यह बीमारी कोविड नहीं है। स्थानीय आबादी के लिए इसका जोखिम कम है।” टेड्रोस ने कहा कि हंटा वायरस की प्रकृति कोरोनावायरस जैसी नहीं है, लेकिन “वह सदमा अभी भी हमारे दिमाग में है।” उन्होंने कहा, “इसीलिए मैं यहां के लोगों के साथ खड़े होने के लिए आया हूं। मुझे यहां आने के लिए अपनी योजनाएं बदलनी पड़ीं, क्योंकि यह पूरी दुनिया और टेनेरिफ के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
अधिकारियों ने बताया कि डच झंडे वाले इस क्रूज शिप के रविवार सुबह टेनेरिफ आइलैंड पर पहुंचने की उम्मीद है। संगठन ने शुक्रवार को बताया था कि शिप पर सवार आठ लोगों में हंटा वायरस के संदिग्ध मामले पाए गए थे और तीन लोगों की मौत हो गई है। इस जहाज के मालिक के अनुसार, अभी जहाज पर सवार 60 क्रू सदस्यों समेत 147 लोगों में से किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
टेड्रोस ने अनुमान लगाया कि लोगों को निकालने के लिए छह उड़ानें ईयू देशों के लिए और चार उड़ानें गैर ईयू देशों के लिए जाएंगी। इस क्रूज में 17 अमेरिकी नागरिक सवार हैं। उन्हें एक छोटी नाव से शिप से उतार कर रनवे पर उनके इंतजार में खड़े विमान तक पहुंचाया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी है कि जहाज से उतारे गए यात्रियों को वायरस के संपर्क में आने के आखिरी समय से लेकर 42 दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाए।
यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना से सफर पर निकला था। यह दक्षिण अटलांटिक के कई दूरदराज के द्वीपों पर रुका। इनमें ट्रिस्टन दा कुन्हा और सेंट हेलेना शामिल हैं। यह दोनों ब्रिटिश क्षेत्र हैं। जहाज पर फैली इस बीमारी की शुरुआत एक डच जोड़े से हुई लगती है, जिन्होंने क्रूज यात्रा से कुछ महीने पहले दक्षिण अमेरिका की सैर की थी।
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