सोने के बाद अब चांदी पर सरकार का बड़ा एक्शन: फ्री लिस्ट से हटाकर रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाला, जानें अब आयात करना क्यों होगा मुश्किल

नई दिल्ली : देश के व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) को थामने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा और कड़ा आर्थिक फैसला लिया है। सोने के बाद अब सरकार ने चांदी के आयात (इंपोर्ट) को लेकर नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। सरकार ने चांदी की कई प्रमुख कैटेगरी को तत्काल प्रभाव से ‘फ्री लिस्ट’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ (प्रतिबंधित सूची) में डाल दिया है। सरकार के इस कदम का सीधा मतलब यह है कि अब देश में चांदी का आयात पहले जितना आसान नहीं रह जाएगा और इसके लिए कारोबारियों को सरकार से विशेष अतिरिक्त लाइसेंस और मंजूरी लेनी होगी।

 

व्यापार घाटे को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर

वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का पूरा ध्यान इस समय भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और डॉलर के मुकाबले रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने पर केंद्रित है। कीमती धातुओं के अंधाधुंध आयात के कारण देश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा था, जिससे चालू खाते का घाटा (CAD) और व्यापार घाटा दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुंचने की आशंका थी। इसी वित्तीय दबाव और जोखिम को कम करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने चांदी के बेधड़क आयात पर नकेल कसने का फैसला किया है।

 

सोने की जगह चांदी में निवेश बढ़ने का था डर, इसलिए सरकार ने की सख्ती

सरकार को इस बात की प्रबल आशंका थी कि सोने पर टैक्स बढ़ने के बाद बाजार का रुख बदल सकता है। हाल ही में सरकार ने सोने और चांदी दोनों पर इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को 6% से सीधे बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसके बावजूद, बाजार विशेषज्ञों का अनुमान था कि सोने की आसमान छूती कीमतों के कारण आम उपभोक्ता और बड़े निवेशक विकल्प के तौर पर सस्ती धातु यानी चांदी की ज्वेलरी और सिक्कों की ओर तेजी से रुख कर सकते हैं। इसी संभावित ट्रेंड और चांदी की मांग में अचानक आने वाले उछाल को रोकने के लिए सरकार ने पहले ही पाबंदियां लागू कर दी हैं।

 

30 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है आयात, अब आएगी और कमी

आधिकारिक सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में देश के भीतर सोने और चांदी का आयात पहले ही रिकॉर्ड गिरावट के साथ करीब 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। आयात में आई इस भारी गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों कीमती धातुओं की रिकॉर्ड तोड़ कीमतें और सरकार द्वारा बढ़ाई गई 15 फीसदी की भारी-भरकम इम्पोर्ट ड्यूटी को मुख्य वजह माना जा रहा है। अब सरकार द्वारा चांदी को रिस्ट्रिक्टेड लिस्ट में डालने के इस नए फैसले के बाद, आने वाले महीनों में चांदी के आयात ग्राफ में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

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