भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलनः हरित विकास, प्रौद्योगिकी और निवेश बढ़ाने पर बनी सहमति

नई दिल्ली : तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में देशों ने हरित विकास, प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा और समुद्री अर्थव्यवस्था समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) तथा भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) का लाभ उठाकर व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति बनी।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इसमें पांचों नॉर्डिक देशों डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन, नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडॉटिर भी शामिल हुई।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स पर कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य भारत के विशाल दायरे और नॉर्डिक नवाचार के बीच सेतु बनाकर भविष्य को सशक्त बनाना रहा। प्रधानमंत्री मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए ओस्लो में अपने नॉर्डिक समकक्षों के साथ शामिल हुए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, भारत और नॉर्डिक देशों के बीच साझेदारी स्थिरता और सतत विकास की एक मज़बूत शक्ति बनी हुई है। नेताओं ने इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ावा देने के लिए भारत-नॉर्डिक संबंधों को ‘हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है।

 

प्रधानमंत्री ने एक्स पर कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों ने पिछले कुछ वर्षों में असाधारण प्रगति की है। व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और निवेश संबंध काफी गहरे हुए हैं। आज के भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि हमने अपने संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह साझेदारी नवाचार को व्यापकता और प्रतिभा के साथ जोड़ेगी, साथ ही स्थिरता, विश्वसनीय प्रौद्योगिकियों और मानवता के बेहतर भविष्य के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगी।

 

बैठक के बाद भारत और नॉर्डिक क्षेत्रों के बीच 8 मुद्दों पर सहमति बनी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त पहल, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। आर्कटिक क्षेत्र में शोध, जलवायु अध्ययन और पर्यावरण निगरानी में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने पर बल दिया गया।

 

ब्लू इकोनॉमी के तहत समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, शिपिंग, मत्स्य पालन और समुद्री प्रौद्योगिकी में साझेदारी बढ़ाने की बात कही गई। सम्मेलन में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने तथा प्रतिभा के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति बनी। रक्षा क्षेत्र में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच औद्योगिक सहयोग, संयुक्त विनिर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

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