ट्विशा शर्मा केस में नया मोड़: दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कोर्ट ने की खारिज, फरार पति पर इनाम बढ़कर हुआ 30 हजार, लुकआउट नोटिस जारी

भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले (Twisha Sharma Case) में पीड़ित परिवार को जिला अदालत से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने मृतका के परिजनों द्वारा दायर की गई उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दिल्ली एम्स (AIIMS) में शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) कराने की गुहार लगाई गई थी। अदालत ने कटारा हिल्स पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि शव को खराब (डीकंपोज) होने से बचाने के लिए उसे तत्काल प्रदेश की किसी अत्याधुनिक संसाधनयुक्त मॉर्च्युरी में सुरक्षित शिफ्ट किया जाए। इस फैसले के बाद अब यह माना जा रहा है कि न्याय की आस में पीड़ित परिवार जल्द ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटा सकता है।

‘भोपाल से बाहर पोस्टमार्टम का आदेश देने का अधिकार नहीं’कोर्ट ने दिया बीएनएसएस (BNSS) का हवाला

बुधवार को इस संवेदनशील याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया कि ट्विशा का पहला पोस्टमार्टम भोपाल एम्स जैसे देश के बेहद प्रतिष्ठित और विश्वसनीय संस्थान के डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया है और पुलिस की तफ्तीश अभी जारी है। कोर्ट ने कानूनी दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 197 के तहत जिला अदालत को अपने स्थानीय क्षेत्राधिकार (Local Jurisdiction) से बाहर यानी दिल्ली या किसी अन्य राज्य में जांच या दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

 

गौरतलब है कि पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर चोट और संघर्ष (Struggle Marks) के कुछ संदिग्ध निशान मिलने के बाद से ही परिवार लगातार दिल्ली एम्स में री-पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ था।

एम्स भोपाल में शव सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं, पुलिस ने दी चेतावनी

अदालत के फैसले से ठीक पहले कटारा हिल्स थाना पुलिस ने ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा को एक अत्यंत महत्वपूर्ण पत्र सौंपा। इस पत्र में पुलिस ने स्पष्ट किया कि एम्स भोपाल में मृतका के शव को वर्तमान में माइनस 6 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा गया है, जबकि शव को लंबे समय तक बिना डीकंपोज हुए पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री सेल्सियस के डीप-फ्रीजर की जरूरत होती है, जो सुविधा फिलहाल भोपाल एम्स में मौजूद नहीं है। पुलिस ने साफ किया कि उन्हें दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाने के लिए परिजन कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर जल्द से जल्द शव को अपने सुपुर्द ले लें।

आरोपी पति समर्थ सिंह देश छोड़कर भागा! लुकआउट नोटिस जारी और इनाम की राशि बढ़ी

दूसरी तरफ, पुलिस ने फरार चल रहे मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर कानूनी शिकंजा बेहद कस दिया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने बुधवार को बड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी समर्थ सिंह पर घोषित इनाम की राशि को ₹10 हजार से बढ़ाकर सीधे ₹30 हजार कर दिया है। इसके साथ ही, आरोपी के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए देश के सभी एयरपोर्ट्स के लिए ‘लुकआउट नोटिस’ (Lookout Notice) भी जारी कर दिया गया है।

 

मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT), साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त 6 टीमें अलग-अलग जनपदों में आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला बेल्ट से फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन हर एंगल से गहनता से जांच की जा रही है।

रिटायर्ड जज सास गिरीबाला सिंह को पद से हटाने की मांग, राज्यपाल तक पहुंचा मामला

इस पूरे मामले में मृतका की सास और रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह भी दहेज हत्या की नामजद एफआईआर (FIR) में आरोपी हैं और फिलहाल अग्रिम जमानत पर बाहर हैं। गिरीबाला सिंह वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम (जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2) की सदस्य/न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। ट्विशा के परिजनों ने राज्यपाल डॉ. मंगू भाई पटेल को एक कड़ा पत्र लिखकर मांग की है कि संगीन आपराधिक मामला दर्ज होने के कारण उन्हें तुरंत जज के पद से बर्खास्त किया जाए।

 

इस संवेदनशील प्रशासनिक मामले पर मध्य प्रदेश सरकार के विभागीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि वह इस विषय में विभाग के एसीएस (ACS) से चर्चा कर फाइल मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री और सरकार के स्तर तक पहुंचाएंगे, ताकि कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर उचित फैसला लिया जा सके।

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