नई दिल्ली : रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक पुस्तक जारी की, जिसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को संजोया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर एक अभूतपूर्व सफलता थी, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को चार दिनों के भीतर ही युद्ध विराम के लिए विवश कर दिया। यह पुस्तक ऐतिहासिक विवरण से परे जाकर वीर सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को समेटती है। साथ ही आधुनिक युद्ध के मानवीय पहलू की वह झलक भी मिलती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिबद्धता रणनीति को सफलता में बदल देती है।
राजनाथ सिंह ने पुस्तक जारी करते हुए कहा कि यह प्रकाशन आधुनिक युद्ध के उस मानवीय पहलू को दर्शाता है, जो रणनीति को सफलता में बदल देता है। यह पुस्तक उन लोगों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान बलिदान दिया। साथ ही उन्होंने इसे सैनिकों की निष्ठा और अदम्य साहस से जुड़ने का एक माध्यम भी बताया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर इस पुस्तक में उन 100 अधिकारियों, नाविकों, वायुसैनिकों और अन्य सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है, जिन्होंने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को चार दिनों के भीतर ही युद्ध विराम के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान से अब तक लड़े गए अन्य सभी युद्धों से अलग था। यह किताब जान-बूझकर आधिकारिक सैन्य इतिहास-लेखन की परंपराओं से हटकर लिखी गई है। यह किताब जवानों के असली अनुभव को फिर से सामने लाने की एक कोशिश है।
पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ मुख्यालय और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के अनुभवों को भी शामिल किया गया है। इसमें लड़ाकू पायलट, नौसेना के वॉचकीपर, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल के क्रू, स्पेशल फोर्स के ऑपरेटर, सिग्नलर, लॉजिस्टिशियन, मेडिकल ऑफिसर और उन संयुक्त व एकीकृत संगठनों के जवान शामिल हैं, जो पूरे ऑपरेशन को एक सूत्र में पिरोते हैं। इस पुस्तक का संकलन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के मार्गदर्शन में किया गया है। समारोह में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह मौजूद थे।
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