New Delhi : सीबीएसई कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से ही देशभर में आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल है। जहां एक ओर सफल छात्र अपनी कामयाबी का जश्न मना रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग इस समय गहरी मानसिक तनाव और भविष्य की चिंता में डूबा है। यह तनाव केवल अंकों का नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली पर उठते गंभीर सवालों का है। छात्रों का आरोप है कि बोर्ड की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और तकनीकी खामियों ने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
पोर्टल की तकनीकी ‘ग्लिच’ से छात्र बेहाल
सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और कॉपियों के वेरिफिकेशन के लिए जो ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, वह शुरुआत से ही तकनीकी दिक्कतों का केंद्र बन गया है। 1 जून से शुरू होने वाले इस पोर्टल को लेकर छात्र दिन भर परेशान रहे, लेकिन बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अंततः अगले दिन सुबह 4:42 बजे एक एक्स (X) पोस्ट के जरिए पोर्टल के चालू होने की सूचना दी गई। हजारों छात्र फीस भुगतान और फॉर्म सबमिशन के लिए घंटों स्क्रीन के सामने बैठने को मजबूर हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है और तनाव बढ़ता जा रहा है।
क्या है ‘सीबीएसई ओएसएम’ विवाद?
इस साल का पुनर्मूल्यांकन ‘सीबीएसई ओएसएम (OSM) कंट्रोवर्सी’ के रूप में चर्चा में है। छात्रों और शिक्षकों ने ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि डिजिटल जांच के दौरान कई कॉपियों में पूरे-पूरे पैराग्राफ और महत्वपूर्ण उत्तर बिना जाँचे ही छोड़ दिए गए, जिससे छात्रों के अंकों में भारी गिरावट आई है। एक छात्र ने बताया कि उसके सही एमसीक्यू (MCQ) को भी गलत मार्क किया गया है। छात्रों का कहना है कि नियमों की जटिलता के कारण वे सीधे ‘अनचेक्ड’ सवालों का दावा नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें वेरिफिकेशन और फोटोकॉपी के लंबे चरणों से गुजरना पड़ रहा है, जो इस डिजिटल प्रणाली की पोल खोलता है।
हाईकोर्ट में पहुंची छात्रों की गुहार
डिजिटल मूल्यांकन में हुई इस कथित धांधली का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट पर है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग की है।
याचिका में शामिल प्रमुख मांगें:
स्वतंत्र जांच: सर्वर ग्लिच, तकनीकी खामियों और अंकों में हेरफेर की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए।
फिजिकल वेरिफिकेशन: जिन आंसर-शीट्स पर संदेह है, उनकी कंप्यूटर स्क्रीन के बजाय फिजिकल जांच हो।
समय सीमा में विस्तार: पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि कम से कम एक महीने बढ़ाई जाए।
ग्रेस मार्क्स की मांग: जिन छात्रों को तकनीकी खामियों या धुंधली (Blur) स्कैनिंग का सामना करना पड़ा है, उन्हें ‘कम्पेनसेटरी मार्क्स’ दिए जाएं।
भविष्य के लिए सुरक्षा: डिजिटल मूल्यांकन के लिए सीबीएसई कड़े सुरक्षा उपाय और स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार करे।
छात्र अब उम्मीद की नजर से अदालत की ओर देख रहे हैं। क्या सीबीएसई इस डिजिटल संकट का समाधान निकाल पाएगा, या लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहेगा?
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