पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी, ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर के ऊपर पहुंचा

नई दिल्ली : ईरान द्वारा बीती रात कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमले के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख है। ब्रेंट क्रूड की कीमत आज उछल कर 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।

 

इस सप्ताह के पहले दो ट्रेडिंग सेशन में ही कच्चे तेल की कीमत में लगभग सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। आज ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की वजह से पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध भड़कने की आशंका बन गई है। इस तनाव के कारण खाड़ी देशों से दुनिया भर के दूसरे देशों में होने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई के भी बाधित होने की आशंका बनी हुई है।

 

आज ब्रेंट क्रूड ने 96.65 डॉलर प्रति बैरल केसर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होते ही इसकी कीमत कुछ देर के लिए घट कर 96.58 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आई, लेकिन इसके बाद इसके भाव में तेजी आ गई। भारतीय समय के मुताबिक सुबह नौ बजे ब्रेंट क्रूड 97.16 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की ट्रेडिंग आज 94.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से शुरू हुई। शुरुआत में ही कुछ देर के लिए यह फिसल कर 93.45 डॉलर प्रति बैरल तक आया। इसके बाद इसके भाव में तेजी आ गई। भारतीय समय के मुताबिक सुबह नौ बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 96.08 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

 

जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। इसी तरह से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली ऑयल टैंकर्स की आवाजाही अभी भी लगभग ठप पड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता का भविष्य भी फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है।

 

खासकर, बीती रात ईरान ने जिस तरह कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैनिक ठिकानों पर मिसाइल हमला किया, उसकी वजह से तनाव में एक बार फिर तेजी आने का डर बन गया है। इस डर के कारण कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है। इसके पहले दोनों देशों के बीच समझौता हो जाने की उम्मीद के कारण मई के महीने में कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से भी नीचे चली गई थी। हालांकि अभी तक दोनों देशों के बीच समझौता होने की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है।

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