चेन्नई : तमिलनाडु की सियासत में इस समय जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य की नवनिर्वाचित सरकार को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। स्टालिन का कहना है कि अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की सरकार अपना तीन महीना भी पूरा नहीं कर पाएगी और जल्द ही गिर जाएगी। छह दशकों के द्रविड़ इतिहास को बदलकर सत्ता में आई इस नई गैर-द्रमुक और गैर-अन्नाद्रमुक सरकार पर स्टालिन के इस तीखे हमले के बाद सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनने के आसार नजर आने लगे हैं।
60 साल का रिकॉर्ड तोड़कर सत्ता में आए थे जोसफ विजय, शुरुआत से ही चौतरफा घिरे
तमिलनाडु की राजनीति में इसी साल (मई 2026) में एक ऐसा ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला था, जिसने पूरे देश को चौंका दिया था। सिनेमा के पर्दे से राजनीति के अखाड़े में उतरे सी. जोसफ विजय ने पूर्ण बहुमत के साथ राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पिछले 60 सालों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब तमिलनाडु की सत्ता से दोनों मुख्य द्रविड़ दल यानी द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) पूरी तरह बेदखल हो गए और किसी तीसरे विकल्प की सरकार बनी।
राजनैतिक पंडित इसे तमिलनाडु में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मान रहे थे, लेकिन विपक्ष का सोचना इससे बिल्कुल जुदा है। सत्ता संभालने के बाद से ही प्रशासनिक अनुभव की कमी और नीतियों को लेकर टीवीके (TVK) सरकार चौतरफा आलोचनाओं से घिरी हुई है।
‘सोचा था 6 महीने चुप रहूंगा, पर हालात बदतर’ – चेन्नई में गरजे स्टालिन
चेन्नई में आयोजित एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने वर्तमान सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े किए। दरअसल, यह कार्यक्रम विदुथलाई चिरुथाईगल काची (VCK) के पूर्व विधायक पनैयूर बाबू और उनके सैकड़ों समर्थकों को द्रमुक में शामिल कराने के लिए आयोजित किया गया था।
नए नेताओं का पार्टी में स्वागत करते हुए स्टालिन ने कहा, “जब मई में यह नई सरकार सत्ता में आई थी, तब मैंने लोकतांत्रिक मर्यादा के तहत यह फैसला लिया था कि मैं शुरुआती छह महीने तक सरकार के कामकाज की कोई आलोचना नहीं करूंगा और उन्हें संभलने का मौका दूंगा। लेकिन अब सूबे के हालात इतनी तेजी से बिगड़ रहे हैं कि मुझे तय समय से पहले ही अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ रही है।” स्टालिन ने आगे दावा किया, “जनता के बीच इस सरकार की अकर्मण्यता को लेकर भारी असंतोष और गुस्सा है। अब सवाल छह, पांच या चार महीनों का नहीं रह गया है; अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सरकार अगले तीन महीने भी टिक पाएगी?”
विरोधियों का भी सम्मान करें: स्टालिन ने कार्यकर्ताओं को दिया ‘अन्ना’ का मंत्र
अपने इस तीखे राजनीतिक हमले के बीच एमके स्टालिन ने राजनीति में शुचिता और अनुशासन का एक अनूठा उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने दूसरी पार्टियों को छोड़कर द्रमुक का दामन थामने वाले नए नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी कि वे अपनी पुरानी पार्टी या नेताओं की सार्वजनिक रूप से कतई बुराई न करें।
स्टालिन ने द्रमुक के संस्थापक और महान नेता सीएन अन्नादुरई के एक बेहद प्रसिद्ध कथन का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा, “अन्ना ने हमें हमेशा सिखाया है कि ‘विरोधी के बगीचे के चमेली के फूल में भी खुशबू होती है।’ राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी को भी व्यक्तिगत रूप से कमतर आंकने या अपमानित करने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने सभी नए साथियों से केवल संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनता के बीच जाने की अपील की। स्टालिन के इस बयान के बाद टीवीके और द्रमुक के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
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