नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। लीक होने वाली परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर अभिजीत दीपके की अगुवाई में यह विरोध प्रदर्शन लगभग पांच घंटे तक चला, जिसमें भारी भीड़ जुटी। हालांकि यह प्रदर्शन खत्म हो चुका है, लेकिन अब पार्टी ने सरकार को नई चेतावनी देते हुए सात दिन का अल्टीमेटम थमाया है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराना है।
प्रदर्शन के एक दिन बाद जारी अपने बयान में अभिजीत दीपके ने दावा किया कि इस आंदोलन ने सरकार तक एक मजबूत संदेश पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “यदि अगले सात दिनों के भीतर धर्मेंद्र प्रधान पद से नहीं हटते या उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, तो हमारा विरोध और भी बड़े स्तर पर फैल जाएगा।”
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अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन ऐतिहासिक है, लेकिन इसकी समाप्ति नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने एक पूरी पीढ़ी के साथ अन्याय किया है। यदि वे सात दिनों के भीतर पद छोड़ते हैं या इस्तीफा नहीं देते, तो पार्टी अपने विरोध को और तेज करेगी। उन्होंने कहा, “मैं जल्द ही इंस्टाग्राम लाइव पर आप सभी को संबोधित करूंगा। जुड़े रहिए।”
प्रदर्शनकर्ताओं ने केंद्र सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को या तो सम्मानपूर्वक इस्तीफा देना चाहिए या फिर सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आशुतोष रांका, मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता, ने चेतावनी दी, “हम सरकार को सात दिन का समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में वे पद से नहीं हटते या इस्तीफा नहीं देते, तो यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।”
अभिजीत दीपके और उनके प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, अब यह सिर्फ ऑनलाइन अभियान तक ही सीमित नहीं रहेगा। नई रणनीति के तहत वे देश के युवाओं और छात्रों से सीधे संपर्क कर रहे हैं। युवाओं से अपील की गई है कि वे अकेले न आएं, बल्कि अपने माता-पिता और पूरे परिवार के साथ इस आंदोलन का हिस्सा बनें।
पार्टी सरकार को नीट (NEET), सीबीएसई, और एसएससी जैसी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनी मोर्चे पर भी घेरने की तैयारी कर रही है। पहले ऑनलाइन याचिका अभियान चलाया गया था, जिसे अब बड़े स्तर पर जमीन पर उतारा जाएगा।
कुल मिलाकर, CJP का अगला कदम सरकार पर दबाव बनाने के लिए और व्यापक रूप से आंदोलन को फैलाने का है। यदि सरकार सात दिनों के भीतर कोई कदम नहीं उठाती, तो पार्टी अपने विरोध को और तेज कर देगी, और आंदोलन पूरे देश में फैलने की आशंका है।
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