MP : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शनिवार को एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गर्भगृह के अंदर गुपचुप तरीके से अष्टधातु की वाग्देवी मूर्ति स्थापित कर दी गई, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ और तुरंत ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने इसे हटा दिया।
घटना उस समय सामने आई जब मूर्ति के पास फूल, अक्षत और अन्य पूजा सामग्री पाई गईं, जिससे पता चला कि वहां अनुष्ठान और पूजा की गई थी। यह घटना तब हुई जब भोजशाला के परिसर के अंदर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली। यह स्थल हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया गया था, जिससे इसकी संवेदनशीलता और भी बढ़ गई थी।
यह घटना सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। भोजशाला का सुरक्षा तंत्र दो स्तरों पर काम करता है—एक तरफ पुलिस कर्मी परिसर की बाउंड्री पर निगरानी रखते हैं, तो दूसरी तरफ ASI के कर्मचारी आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। बावजूद इसके, गुपचुप तरीके से मूर्ति कैसे स्थापित हुई, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मूर्ति किसने लाया, कब लाई और कई घंटों तक यह गतिविधि कैसे सुरक्षित रही, जबकि सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मी उसकी भनक तक नहीं लग पाए।
धार कोतवाली के एसएचओ दीपक सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं किया गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भोजशाला परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति प्राप्त वस्तुओं की सूची या नियमावली अभी पूरी तरह तय नहीं है, जिसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। ASI के मुख्य पुरातत्वविद् प्रशांत पाटणकर ने इस घटना पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
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