नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को समाज के कल्याण के लिए समर्पित एक सच्चे बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डालते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों के माध्यम से हम एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की ओर से अग्रसर हैं।”
उन्होंने संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें लिखा, “आर्यकर्माणि राज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।हितं च नाभ्यसुयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥”
इस सुभाषित का अर्थ है कि जो व्यक्ति सदा नेक और सदाचारी कार्यों में लगा रहता है, समाज की प्रगति और कल्याण के प्रति समर्पित रहता है, दूसरों के लाभकारी शब्दों और कार्यों का सम्मान करता है और उनके प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखता, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।
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