ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन इंदौर में विदेशी प्रतिनिधियों ने की राजवाड़ा में हेरिटेज वॉक, इंदौरी स्वाद का भी लिया आनंद

इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदाैर शहर में चल रहे पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार सुबह इंदौर की सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य का अनूठा रंग देखने को मिला। ब्रिक्स देशों समेत 20 से अधिक देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा में हेरिटेज वॉक कर शहर के गौरवशाली इतिहास को करीब से जाना। इसके बाद प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट का भ्रमण कर कृषि उत्पादों, जैविक खेती और ग्रामीण उद्यमों की झलक देखी।

 

 

 

ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छतरी से होनी थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। राजवाड़ा पहुंचे विदेशी मेहमानों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया गया। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई। होलकरकालीन दरबार की झांकी, हरकारों की गूंज, शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने प्रतिनिधियों को भारतीय परंपरा और मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इतिहासकारों ने उन्हें देवी अहिल्याबाई होलकर और होलकर शासनकाल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी दी।

 

हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिनिधि गोपाल मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने ऐतिहासिक भवनों की आकर्षक लकड़ी नक्काशी और स्थापत्य कला को निहारा। विदेशी मेहमान मंदिर परिसर की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व से खासे प्रभावित नजर आए। इंदौर की पहचान बन चुके पारंपरिक नाश्ते पोहा-जलेबी का स्वाद भी विदेशी मेहमानों ने लिया। चाय-कॉफी के साथ परोसे गए स्थानीय व्यंजनों की उन्होंने सराहना की।

 

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि नवाचार, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे विषयों पर चर्चा जारी है। बुधवार को संयुक्त घोषणा-पत्र के मसौदे पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जबकि शाम को सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकें होंगी।

 

सम्मेलन के पहले दिन भारत और रूस के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कृषि व्यापार बढ़ाने, तकनीकी सहयोग मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने जलवायु-अनुकूल खेती और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। 9 से 13 जून तक चल रहे इस सम्मेलन के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन मध्य प्रदेश को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर प्रदान करेगा।

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