New Delhi : आज 12 जून 2026 है। ठीक एक साल पहले, यानी 12 जून 2025 को एअर इंडिया के अहमदाबाद से लंदन जा रहे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान (AI-171) के साथ वह खौफनाक हादसा हुआ था जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। इस दर्दनाक दुर्घटना में 239 यात्रियों और 21 क्रू मेंबर्स समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों के मुताबिक किसी भी बड़े विमान हादसे के एक साल के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपनी होती है। आज इस बरसी पर दुनिया भर की नजरें भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) पर टिकी हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि पीड़ित परिवारों को आज भी नहीं पता कि उनके अपने किसकी लापरवाही का शिकार हुए। आइए जानते हैं उस काली तारीख का पूरा घटनाक्रम और विवादों में घिरी जांच की इनसाइड स्टोरी।
12 जून 2025: टेकऑफ के बाद वो खौफनाक 32 सेकंड
हादसे वाले दिन सुबह से ही इस बोइंग 787 विमान (वीटी-एएनबी) में तकनीकी गड़बड़ियों का सिलसिला शुरू हो चुका था।
सुबह 09:48 बजे (पिछली उड़ान): इस विमान ने कैप्टन हरदीप देओल की कमान में दिल्ली से अहमदाबाद के लिए (फ्लाइट AI-423) उड़ान भरी।
सुबह 10:40 बजे: अहमदाबाद में लैंडिंग के दौरान विमान के ‘स्टेबलाइजर सेंसर’ ने गलत सिग्नल देने शुरू किए और एयर-कंडीशनिंग सिस्टम भी ठप हो गया।
दोपहर 12:10 बजे: ग्राउंड इंजीनियर्स ने विमान की जांच की और इसे अगली उड़ान (AI-171) के लिए ‘सेफ’ घोषित करते हुए क्लीयरेंस दे दी।
दोपहर 01:23 बजे: कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर कॉकपिट में थे। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक रनवे पर टैक्सीिंग के दौरान भी विमान में कुछ वार्निंग लाइट्स जली थीं।
खौफनाक अंत: विमान ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए टेकऑफ किया। टेकऑफ करते ही सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि विमान का इमरजेंसी पावर सोर्स ‘रैम एयर टरबाइन’ (RAT) हवा में खुल गया, जो किसी महा-इलेक्ट्रिकल फेलियर का सबूत था। टेकऑफ के महज 32 सेकंड के भीतर विमान सिर्फ 630 फीट की ऊंचाई तक जा पाया और अचानक नीचे गिरकर क्रैश हो गया। इस हादसे में सिर्फ एक भाग्यशाली यात्री विश्वकुमार रमेश (ब्रिटिश नागरिक) जिंदा बचे।
शुरुआती जांच रिपोर्ट: जिसने मृत पायलटों को ही बना दिया ‘बलि का बकरा’!
हादसे के एक महीने बाद 12 जुलाई 2025 को रात के 1 बजे AAIB ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की, जिसने न्याय के बजाय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दे दिया। रिपोर्ट के दो मुख्य बिंदुओं पर भारी बवाल हुआ
फ्यूल सप्लाई का अचानक कटना: रिपोर्ट में कहा गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों का फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ मोड पर आ गया था, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया।
कॉकपिट की अधूरी बातचीत: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) के हवाले से एक अधूरी बातचीत जारी की गई। इसमें एक पायलट पूछता है- “तुमने फ्यूल क्यों कट-ऑफ किया?” दूसरा कहता है- “मैंने ऐसा नहीं किया!”
क्यों भड़का पायलटों का गुस्सा?
इस अधूरी बातचीत के आधार पर विदेशी मीडिया ने यह नैरेटिव सेट करना शुरू कर दिया कि कैप्टन सुमीत सभरवाल ने जानबूझकर (सुसाइडल टेंडेंसी के तहत) ईंधन बंद किया था। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) और कैप्टन के पिता ने इसे एविएशन कंपनी ‘बोइंग’ को बचाने की साजिश करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अपनी साख और अरबों डॉलर बचाने के लिए बोइंग और जांच एजेंसियां मरे हुए पायलटों को बलि का बकरा बना रही हैं, क्योंकि वे अपना बचाव करने के लिए जिंदा नहीं हैं। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है, जहां स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों के दावे: पायलट नहीं, ‘इलेक्ट्रिकल घोस्ट’ था जिम्मेदार
उड्डयन विशेषज्ञों और इंजीनियर्स ने AAIB की शुरुआती रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाते हुए 3 बड़े तकनीकी काउंटर दिए हैं:
मिड-एयर रीबूट की थ्योरी: विशेषज्ञों का मानना है कि विमान के कोर नेटवर्क में पहले से खराबी थी। टेकऑफ के वक्त एक बड़े इलेक्ट्रिकल फेलियर (शॉर्ट सर्किट) के कारण विमान के कंप्यूटर ‘मिड-एयर रीबूट’ (बंद होकर दोबारा चालू) हो गए। कंप्यूटर क्रैश होने के कारण विमान के ऑटोमैटिक सिस्टम ने खुद ही फ्यूल सप्लाई काट दी, भले ही पायलटों ने स्विच को हाथ भी न लगाया हो। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर ने इसे सिर्फ ‘स्विच कटऑफ’ के रूप में दर्ज किया।
इंजन रीस्टार्ट का झूठ: रिपोर्ट में कहा गया कि पायलटों ने हवा में इंजन दोबारा चालू करने की कोशिश की। विशेषज्ञों के मुताबिक 180 नॉट की बेहद कम स्पीड पर और बिना ‘असिस्टेंट पावर यूनिट’ (APU) के, बीच हवा में इंजन रीस्टार्ट करना भौतिक (Physically) रूप से असंभव था।
रैम एयर टरबाइन (RAT) का राज: सिमुलेटर टेस्ट बताते हैं कि RAT को खुलने में 14-18 सेकंड लगते हैं। इसका मतलब है कि RAT ईंधन कटने से काफी पहले ही खुल चुका था, जो साफ करता है कि विमान में टेकऑफ से पहले ही कोई भयंकर शॉर्ट-सर्किट या इलेक्ट्रिकल खराबी आ चुकी थी।
अब कहां तक पहुंची जांच और क्यों हो रही है देरी?
आज 12 जून 2026 को इस त्रासदी को पूरा एक साल हो चुका है। नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने मई में आश्वासन दिया था कि रिपोर्ट एक महीने में आ जाएगी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक फाइनल रिपोर्ट में अभी कुछ महीनों की और देरी हो सकती है।
देरी की मुख्य वजहें:
अंतरराष्ट्रीय लैब में जांच: क्रैश हुए विमान के इंजनों का विस्तृत फोरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण अभी भी अमेरिका की लैब में चल रहा है।
फ्रांस गई टीम: विमान के ‘इंजन कंट्रोल सिस्टम’ और ‘इंजन मैनेजमेंट यूनिट’ के जले हुए मलबे और चिप्स का अध्ययन करने के लिए भारतीय जांचकर्ताओं की एक स्पेशल टीम पिछले महीने ही फ्रांस रवाना हुई थी, जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है।
अंतरिम रिपोर्ट पर सस्पेंस: ICAO नियमों के मुताबिक अगर अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं है, तो आज सरकार को एक ‘अंतरिम प्रोग्रेस रिपोर्ट’ जारी करनी होगी। हालांकि, पायलट संघों ने सरकार से मांग की है कि आधी-अधूरी अंतरिम रिपोर्ट जारी न की जाए, क्योंकि इससे केवल नई कॉन्सपिरेसी थ्योरी (अफवाहों) को हवा मिलेगी। सीधा फाइनल तकनीकी रिपोर्ट ही सामने रखी जाए।
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