सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर मामले में एक्शन का काउंटडाउन शुरू, 6 महीने में पूरी हो कार्रवाई

Lucknow : देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से जुड़े एक बेहद चर्चित मामले में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को बेहद कड़ा निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकारों को साफ लफ्जों में आदेश दिया है कि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ पिछले लंबे समय से लंबित पड़ीं चार अनुशासनात्मक कार्यवाहियों (Disciplinary Proceedings) को आगामी छह महीने के भीतर हर हाल में समाप्त किया जाए। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक और सियासी हलचल तेज हो गई है।

 

2021 में मिली थी अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 2028 तक था कार्यकाल

आपको बता दें कि साल 1992 बैच के यूपी कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रहे अमिताभ ठाकुर को 23 मार्च, 2021 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक बड़ा फैसला लेते हुए सेवा से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त (Compulsory Retirement) कर दिया गया था। सरकार ने संबंधित नियमों का हवाला देते हुए यह आधार बनाया था कि अमिताभ ठाकुर ‘सार्वजनिक हित में सेवा बनाए रखने के लिए अयोग्य’ हैं, जिसके पीछे उनके खिलाफ चल रही कई विभागीय जांच और अनुशासनात्मक शिकायतें थीं। अगर यह कार्रवाई न होती, तो वे साल 2028 तक अपनी सेवाएं देते रहते।

 

सुप्रीम कोर्ट ने दिया 6 महीने का समय, यूपी सरकार ने रखी दलील

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की एक आंशिक कार्य दिवस (पीडब्ल्यूडी) पीठ के समक्ष इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील रुचिरा गोयल की दलीलों और प्रस्तुतियों पर पीठ ने गहराई से ध्यान दिया। सरकारी वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि वर्तमान में पूर्व आईपीएस ठाकुर के खिलाफ कुल चार अनुशासनात्मक कार्यवाहियां पेंडिंग हैं, जिन पर प्रक्रिया चल रही है।

 

पेंशन-ग्रेच्युटी रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता

दूसरी तरफ, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ ये कार्यवाहियां पिछले 10 वर्षों से जानबूझकर लंबित रखी गई हैं, जबकि उन्होंने सभी कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) का समय पर जवाब दे दिया है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि इन लंबित जांचों की आड़ में उनकी सेवानिवृत्ति राशि, जिसमें ₹10 लाख का ग्रेच्युटी फंड भी शामिल है, को अभी तक जारी नहीं किया गया है। ठाकुर ने पीठ से गुहार लगाई थी कि अधिकारियों को 3 महीने में जांच खत्म करने का आदेश दिया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने बीच का रास्ता निकालते हुए केंद्र और राज्य सरकार को 6 महीने की सख्त समयसीमा तय कर दी।

 

मुलायम सिंह यादव से विवाद और निलंबन का पुराना इतिहास

अमिताभ ठाकुर की पुलिस सेवा का इतिहास लगातार तत्कालीन राज्य सरकारों के साथ टकराव और तनाव से भरा रहा है। साल 2015 में वह देश की सुर्खियों में तब आए थे, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के तत्कालीन कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा फोन पर कथित रूप से धमकी दिए जाने की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग को सरेआम सार्वजनिक कर दिया था। इस बेहद संवेदनशील और राजनीतिक बवाल के तुरंत बाद उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था।

 

अब सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद देखना होगा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार 6 महीने के भीतर जांच पूरी कर उनके रुके हुए फंड जारी करती है या नहीं।

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