वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंज शहीदा मस्जिद को लेकर हाल ही में एक विवादित मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। रेलवे की तरफ से जारी एक नोटिस के बाद से यह मामला गरमाया हुआ है, जिसमें कहा गया है कि वाराणसी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार के पास (सर्कुलेटिंग एरिया के पास) रेलवे भूमि पर अवैध रूप से बनी मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया गया है। रेलवे का तर्क है कि यह मस्जिद रेलवे की विकास परियोजनाओं में बाधक बन रही है, और इसलिए इसे समय सीमा में हटा लिया जाए।
यह नोटिस उस समय जारी किया गया जब संबंधित मस्जिद के संबंध में पहले से ही एक मुकदमा चल रहा था, जिसे माननीय न्यायालय ने 28 अगस्त को खारिज कर दिया था। रेलवे ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि इस मस्जिद को लेकर कोई समस्या नहीं है, और यह कि मस्जिद 1034 में बनी थी, जो 1883-84 के नक्शों में भी दर्ज है। इससे पहले के नक्शों में भी इसका उल्लेख है। रेलवे का दावा है कि यह मस्जिद रेलवे से पहले की है और उसका कोई अवैध निर्माण नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन की नोटिस भ्रामक है और इसे धार्मिक एवं कानूनी लड़ाइयों को भड़काने का प्रयास माना है।
मामले में मस्जिद की ओर से भी जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि नोटिस पर न तो किसी अधिकारी का हस्ताक्षर है और न ही जारी करने की सही तिथि। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिस मुकदमे का जिक्र है, वह मस्जिद के बाहर पूरब की जमीन से संबंधित था, और उसका मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। जवाब में यह भी तर्क दिया गया है कि रेलवे की यह कार्रवाई भ्रामक है, और इससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।
इस विवाद के बीच, वाराणसी में पुलिस प्रशासन और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने एक विरोध प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता का है और इसका किसी भी तरह से धार्मिक या ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ाव नहीं है। इसके साथ ही, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया दी है।
असिफ अली जरदारी ने अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट में कहा कि भारत में मुसलमानों के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को गिराने की घटनाओं को देखकर उन्हें गहरी चिंता हुई है। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी की 1000 साल पुरानी मस्जिद गंज शहीदा का जिक्र किया, और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां भारत के साझा सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा रही हैं। जरदारी ने भारत से इन कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की, और चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो इससे देश में अराजकता फैल सकती है और देश का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई द्वेषपूर्ण है और इससे भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा विरासत की रक्षा के लिए सरकार से तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।
Shaurya Times | शौर्य टाइम्स Latest Hindi News Portal