अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में सेंधमारी करने वालों पर आखिरकार कानून का डंडा चल गया है। मंदिर में दान की चोरी के सनसनीखेज मामले में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि दर्ज हुई FIR में न तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम है और न ही डॉक्टर अनिल मिश्रा का। पुलिस ने जिन 8 लोगों को नामजद किया है, उनमें कोई भी ‘बड़ा चेहरा’ शामिल नहीं है।
CCTV फुटेज से खुला राज, लपेटे में आए 6 कैशियर
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की जांच में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की बारीकी से पड़ताल की गई थी। इस फुटेज में कुछ लोग सीधे तौर पर दान की रकम में हेराफेरी और चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने जिन 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, उनमें से 6 बैंक के कैशियर बताए जा रहे हैं, जो मंदिर के चढ़ावे को गिनने और संभालने का काम करते थे। बाकी के 2 लोग वो हैं जिन्होंने इस चोरी में उनका साथ दिया। इन सभी पर बीएनएस की धारा 306, 316 (5), 317 (4), 61 और 3(5) के तहत शिकंजा कसा गया है।
विश्व हिंदू परिषद का फूटा गुस्सा, अयोध्या में बुलाई इमरजेंसी बैठक
राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की बात सामने आने के बाद से ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) बेहद आक्रामक और आक्रोशित नजर आ रही है। इस घटनाक्रम के बाद अयोध्या में आनन-फानन में विहिप की एक बेहद अहम और बड़ी बैठक बुलाई गई। बैठक में संगठन के 5 शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे, जिसमें आगामी रणनीति और मंदिर की सुरक्षा को लेकर कड़े फैसलों पर मंथन हुआ। बैठक में मौजूद विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रभु श्रीराम के दरबार में चोरी करने वाले अधर्मियों की सही जगह सिर्फ और सिर्फ जेल है।
विहिप ने उठाईं 4 बड़ी मांगें, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले केस
इस महामंथन के बाद विश्व हिंदू परिषद ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी 4 प्रमुख मांगें रखी हैं:
चढ़ावा चोरी कांड में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ बिना किसी देरी के तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज की जाए (जिस पर अमल शुरू हो चुका है)।
राम मंदिर परिसर और दान से जुड़े सभी संदिग्ध मामलों की बेहद तेजी और निष्पक्षता से जांच की जाए, ताकि पूरा सच देश के सामने आ सके।
आस्था से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (त्वरित न्यायालय) का गठन हो, ताकि केस लंबा न खिंचे।
भगवान के घर में डाका डालने वाले अपराधियों को ऐसी कड़ी से कड़ी सजा मिले जो मिसाल बन जाए।
अब जब पुलिस ने इस मामले में पहली बड़ी एफआईआर दर्ज कर ली है, तो पूरी अयोध्या समेत देश भर के राम भक्तों की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और गिरफ्तारियों पर टिक गई हैं।
Shaurya Times | शौर्य टाइम्स Latest Hindi News Portal